आस्था भट्टाचार्य
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अगले हफ्ते अमेरिका दौरे की चर्चा के बीच इस पर भी बात हो रही है कि क्या भारतीय सेना के लिए स्ट्राइकर को लेकर भी इस दौरान कुछ बात होगी। स्ट्राइकर आईसीवी यानी इन्फ्रेंट्री कैरियर व्हीकल (जो सैनिकों को ले जाते हैं और इनमें हथियार भी लगे होते हैं)। भारतीय सेना लंबे वक्त से अपने पुराने आईसीवी को फेज आउट करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर 12 व 13 फरवरी को अमेरिका दौरे पर रहेंगे। इससे पहले 11 फरवरी को वह पेरिस में एआई समिट 2025 की सहअध्यक्षता भी करेंगे। 12 फरवरी को दोपहर वह फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्राें के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे।
लगातार स्ट्राइकर प्रोजेक्ट कर रहा यूएस
अमेरिका भी लगातार स्ट्राइकर प्रोजेक्ट को प्रमोट कर रहा है और इसे भारत के साथ लगातार बढ़ती डिफेंस पार्टनरशिप के तौर पर देख रहा है। शुरुआती प्रस्ताव के मुताबिक, भारत कुछ स्ट्राइकर यूएस फॉरेन मिलिट्री सेल्स के तहत खरीदेगा। फिर भारत-अमेरिका मिलकर भारत में ही इसका जॉइंट प्रॉडक्शन करेंगे। बाद में दोनों देश मिलकर इसका फ्यूचर वर्जन भी डेवलप कर सकते हैं।
लद्दाख में देखा था स्ट्राइकर का प्रदर्शन
स्ट्राइकर आईसीवी को यूएस फर्म जनरल डायनामिक्स लैंड सिस्टम्स बनाती है। पिछले साल अक्टूबर में जनरल डायनामिक्स की भारतीय पार्टनर कंपनी ने लद्दाख में सेना को स्ट्राइकर का डेमो दिया था। सूत्रों के मुताबिक, डेमो तीन दिन चला। यह ट्रायल नहीं था, सिर्फ डेमोनस्ट्रेशन यानी स्ट्राइकर का प्रदर्शन था। भारतीय पार्टनर कंपनी अपने खर्चे पर इसे लद्दाख लाई और सेना के सीनियर अधिकारियों को इसकी क्षमता दिखाई। एक अधिकारी ने कहा कि वहां के तापमान में स्ट्राइकर का इंजन सही से काम कर रहा था जो एक बेसिक योग्यता है।
क्या है इसकी खासियत 8 पहियों वाला इन्फ्रेंट्री कैरियर व्हीकल है।
30एमएम और 105एमएम की गन इसमें लगी हैं। 100 किमी. प्रति घंटे की इसकी रफ्तार है। इसमें सैनिकों की सुरक्षा के लिए बोल्ट ऑन सेरेमिक आर्म्ड प्रोटेक्शन है। चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए आसानी से ऊंचाई वाले इलाके में पहुंचाया जा सकता है।
यूक्रेन युद्ध में भी इस्तेमाल
स्ट्राइकर का इस्तेमाल अफगानिस्तान में भी हो चुका है। हाल ही में इसे रूस-यूक्रेन युद्ध में भी इस्तेमाल किया गया है। भारतीय सेना के पास अभी जो आईसीवी हैं (बीएमपी-2), ये एंफीबियस हैं यानी ये नदी-नाले को भी आसानी से पार कर सकते हैं, लेकिन अमेरिकी स्ट्राइकर में ये खूबी नहीं है। सेना की मैकेनाइज्ड इन्फ्रेंट्री की कुल 50 बटालियन हैं और हर बटालियन में 52 वील्ड और ट्रैक वाले आईसीवी हैं।
फेजआउट करने हैं पुराने व्हीकल
भारतीय सेना अपनी मैकेनाइज्ड इन्फ्रेंट्री से पुराने इईसीवी को फेज आउट करने की तैयारी में है। सेना को 500 से ज्यादा नए आईसीवी चाहिए हैं। सेना की मैकेनाइजड इंफ्रेंट्री में अभी 2000 के करीब आईसीवी हैं। ये रूसी आईसीवी बीएमपी-2 हैं। ये दो तरह के हैं- एक ट्रैक्ड यानी कि टैंक की तरह ट्रैक पर चलने वाले और दूसरे टायरों पर चलने वाले। सेना वील्ड आईसीवी को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इसके लिए स्वदेशी कंपनियों से भी बात की गई है। डीआरडीओ ने भी करीब 10 साल पहले 8 पहियों वाला व्हैप यानी वील्ड आर्म्ड प्लैटफ़ॉर्म तैयार किया है। इसका इस्तेमाल इन्फ्रेंट्री कैरियर व्हीकल के तौर पर हो पाएगा या नहीं, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है।






























