ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत की सैन्य तैयारी के लिहाज से साल 2026 टर्निंग पॉइंट साबित होने जा रहा है। थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों को एक साथ ऐसे आधुनिक हथियार और प्लेटफॉर्म मिलने वाले हैं, जो भारत को क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में और मजबूत बनाएंगे। ‘मेक इन इंडिया’ अब केवल नीति नहीं रही, बल्कि युद्ध क्षमता का आधार बन चुका है।
भारतीय सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह साफ कर दिया था कि भारत त्वरित और सटीक जवाब देने में सक्षम है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य योजनाकारों ने भविष्य की जंग को ध्यान में रखते हुए लॉन्ग-टर्म तैयारी को प्राथमिकता दी। 2026 में मिलने वाले प्लेटफॉर्म्स इसी रणनीतिक सोच का नतीजा हैं, जो भारत को मल्टी-डोमेन वॉरफेयर के लिए तैयार करेंगे।
तेजस एमके-1ए भारतीय आसमान की रीढ़
भारतीय वायुसेना के लिए 2026 खास इसलिए है क्योंकि इसी साल तेजस एमके-1ए की डिलीवरी तेज रफ्तार पकड़ेगी। एचएएल की तरफ से तैयार यह फाइटर जेट पहले के तेजस की तुलना में ज्यादा घातक, ज्यादा स्मार्ट और ज्यादा भरोसेमंद है। आईडीआरडब्ल्यूए की रिपोर्ट के मुताबिक आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर रडार और एडवांस हथियारों के साथ तेजस एमके-1ए वायुसेना की स्क्वाड्रन कमी को भरने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे भारत की एयर डॉमिनेंस क्षमता को सीधा फायदा मिलेगा।
आईएनएस अरिदमन परमाणु गारंटी
भारतीय नौसेना के लिए 2026 की शुरुआत ऐतिहासिक मानी जा रही है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने दिसंबर महीने की शुरुआत में ही एलान किया था कि जल्द ही इंडियन नेवी में आईएनएस अरिदमन शामिल होगा। इसके शामिल होते ही भारत की न्यूक्लियर ट्रायड और मजबूत हो जाएगी। यह परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी दुश्मन की नजरों से दूर रहकर जवाबी परमाणु हमला करने में सक्षम होगी। इसका मतलब साफ है कि भारत की सेकंड-स्ट्राइक क्षमता अब और विश्वसनीय हो जाएगी, जो किसी भी परमाणु धमकी को बेअसर कर सकती है।
सी-295 होगा गेम-चेंजर
भारत को पहला स्वदेशी रूप से निर्मित सी-295 ट्रांसपोर्ट विमान 2026 में मिलने वाला है। वडोदरा में टाटा-एयरबस की तरफ से तैयार यह विमान भारतीय एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है। यह विमान सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों, हथियारों और राहत सामग्री की तेज आवाजाही को आसान बनाएगा। इससे भारत की सैन्य मोबिलिटी और आपदा-प्रबंधन क्षमता दोनों मजबूत होंगी।
स्टेल्थ फ्रिगेट समंदर में अदृश्य ताकत
भारतीय नौसेना के लिए 2026 में प्रोजेक्ट-17ए के तहत बनाए गए स्टेल्थ फ्रिगेट शामिल किए जाएंगे। ये युद्धपोत रडार से बचने की क्षमता रखते हैं और आधुनिक सेंसर व हथियारों से लैस हैं। इन फ्रिगेट्स की तैनाती से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री पकड़ और मजबूत होगी, खासकर तब जब चीन अपनी नौसैनिक मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है।
आकाश एनजी और हाई-टेक ड्रोन
2026 में भारत की एयर डिफेंस क्षमता को भी बड़ा अपग्रेड मिलेगा। आकाश नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल सिस्टम दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल हमलों को पहले से ज्यादा सटीकता से रोकने में सक्षम होगा। इसके साथ आधुनिक आईएसआर ड्रोन रियल-टाइम निगरानी और सटीक टारगेटिंग में सेना की आंख और कान बनेंगे।































