अनिल वोहरा
भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत कृषि व राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किसान पहचान पत्र (फार्मर आइडी) बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 75 प्रतिशत किसानों के पहचान पत्र बन गए हैं, शेष किसानों को पहचान पत्र बनवाने के लिए मई माह तक का समय दिया गया है।
31 मई 2026 से प्रदेश में उन्हीं किसानों को सरकारी योजना का लाभ मिलेगा, जिनके पास किसान पहचान पत्र होगा। सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए किसान पहचान पत्र को ही आधार माना जाएगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव एसपी गोयल की ओर से शासनादेश जारी किया गया है।
प्रमुख सचिव ने किसान पहचान पत्र प्राथमिकता पर तैयार करने के लिए प्रदेश में अधिक से अधिक शिविर लगाने के भी निर्देश दिए हैं, जिससे कि किसानों को पहचान पत्र बनवाने में परेशानी न हो। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा भविष्य में प्रदान की जाने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किश्तों को भी पहचान पत्र बनवाने वाले किसानों को ही देने के लिए कहा है।
– कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा भविष्य में प्रदान की जाने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किश्तों को भी पहचान पत्र बनवाने वाले किसानों को ही देने के लिए कहा है।
कृषि विभाग द्वारा उर्वरक, बीज, कीटनाशक के वितरण व लाभार्थियों के चयन में भी किसान पहचान पत्र को आधार बनाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय किए जाने वाले कृषि उत्पाद के क्रय के लिए भी किसान पहचान पत्र को अनिवार्य किया गया है। इसके लिए एक मई तक पोर्टल को पूरी तरह तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लाभार्थी चयन में परेशानी न हो।
गाजियाबाद में कुल 65 हजार किसान हैं। इनमें से किसान 50,034 किसानों के किसान पहचान पत्र बन गए हैं। जिले में 38,412 किसान पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ लेते हैं, इनमें से 36 हजार किसानों ने पहचान पत्र बनवा लिए हैं।
एक डिजिटल पहल
सरकार द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल पहल है, जो किसानों को भूमि रिकॉर्ड और आधार से जोड़कर एक विशिष्ट यूनिक आईडी प्रदान करती है। यह कार्ड सब्सिडी, फसल बीमा, और पीएम-किसान जैसी योजनाओं का लाभ बिना बिचौलियों के सीधे पाने, खेती में तकनीक को बढ़ावा देने और कागजी कार्रवाई कम करने के लिए अनिवार्य हो रहा है।
योजनाओं का लाभ लेने के लिए पहचान पत्र अनिवार्य
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब किसानों को किसान पहचान पत्र बनवाना अनिवार्य होगा। इस संबंध में बुधवार को प्रमुख सचिव ने शासनादेश जारी किया है। जिले में प्रत्येक ग्राम पंचायत, सहकारी समितियों, गन्ना समितियों के कार्यालय पर शिविर लगाए जाएंगे। जिससे कि सभी किसान अपना किसान पहचान पत्र बनवा सकें। इसके अलावा किसान स्वयं भी और जनसेवा केंद्र पर जाकर भी किसान पहचान पत्र बनवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। – राम जतन मिश्र, उप कृषि निदेशक
किसान नई पहचान के मुख्य बिंदु
उद्देश्य: वास्तविक किसानों की पहचान करना और सरकारी योजनाओं (जैसे पीएम किसान) का सीधा लाभ (डीबीटी) सुनिश्चित करना।
आधार लिंकेज: यह आईडी आधार नंबर, मोबाइल नंबर और भूमि रिकॉर्ड (एंग्री स्टैक) से जुड़ी होती है।
फायदे: इससे फसल ऋण, कृषि सब्सिडी और नई तकनीक तक पहुंच आसान हो जाती है।
अनिवार्यता: आने वाली किस्तों के लिए यह डिजिटल आईडी जरूरी की जा रही है।
पंजीकरण और स्टेटस कैसे चेक करें?
पीएम–किसान पोर्टल या राज्य के एग्रीस्टैक पोर्टल पर जाएं।
‘Farmer ID Registration’ या ‘Know Your Status’ पर क्लिक करें।
आधार और मोबाइल नंबर के माध्यम से e-KYC पूरी करें।
यह पहल कृषि में पारदर्शिता लाकर किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बना रही है, जिसे ‘उन्नत खेती, समृद्ध किसान’ के रूप में देखा जा रहा है।












