डा. सीमा द्विवेदी
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसरो के स्वदेशी सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का इग्निशन परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया। यह परीक्षण वैक्यूम परिस्थितियों में तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में उच्च ऊंचाई परीक्षण यूनिट में किया गया। बता दें कि सीई20 क्रायोजेनिक इंजन गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण है।
इसरो ने कहा कि इंजन पहले से ही सिंगल स्टार्ट के साथ उड़ान में 19टी से 22टी तक के थ्रस्ट लेवल पर काम करने के योग्य है। यह गगनयान मिशन के लिए भी तैयार है। इससे पहले, ‘मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर’ का इस्तेमाल कर इंजन प्रज्वलन परीक्षण वैक्यूम कक्ष के बाहर जमीनी परिस्थितियों में किया गया था। इसरो ने कहा, इंजन पहले से ही एकल शुरुआत के साथ उड़ान में 19टी से 22टी तक के ‘थ्रस्ट’ स्तर पर काम करने के लिए उपयुक्त है। यह गगनयान मिशन के लिए भी उपयुक्त है।
बता दें कि उड़ान के दौरान वैक्यूम परिस्थितियों में क्रायोजेनिक इंजन को फिर से शुरू करना स्वाभाविक रूप से जटिल है। ऐसे में इंजन को दोबारा शुरू करने के लिए परीक्षण के चरण में इसरो केंद्रीय गैस प्रणाली के बजाय बूटस्ट्रैप मोड में टर्बोपंप की शुरुआत की खोज कर रहा है। गौरतलब है कि इसरो उड़ान के दौरान क्रायोजेनिक इंजन को फिर से आरंभ करने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बूटस्ट्रैप मोड में इंजन शुरू करने के उद्देश्य से एक के बाद एक परीक्षण कर रहा है। इससे पहले, मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का उपयोग करके इंजन इग्निशन परीक्षण वैक्यूम चैम्बर के बाहर जमीनी परिस्थितियों में किया गया था।
हमारे मिशनों को होगा फायदा : नारायणन
इसरो प्रमुख एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी नारायणन ने कहा कि यह परीक्षण मिशनों के लिए फायदेमंद होगा। हम मिशन के लाभ के लिए उड़ान में क्रायोजेनिक चरण को फिर से शुरू करना चाहते हैं। इसलिए, हमने हाल ही में इस दिशा में एक परीक्षण किया है। वहीं स्पेडेक्स मिशन में गड़बड़ियों को लेकर आई खबरों पर नारायणन ने कहा, कोई गड़बड़ नहीं है, अभी यह डॉक पर है। हम कदम दर कदम आगे बढ़ रहे हैं। हम अध्ययन कर रहे हैं और उसके बाद हम बहुत सारे प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं।























