गुलशन वर्मा
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जनवरी से हर केस में वकीलों की मौखिक दलीलों के लिए सख्त समय सीमा लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य न्यायिक समय का समान बंटवारा सुनिश्चित करना है ताकि गरीब और साधारण मुवक्कि लों के मामले भी निर्धारित तारीख पर सुने जा सकें।
सीजेआई ने यह टिप्पणी पूरे देश में जारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की। बेंच के सामने कई वरिष्ठ अधिवक्ता लंबी-लंबी दलीलें दे रहे थे, तभी सीजेआई ने कहा- जो हो रहा है, वह पूरी तरह अन्यायपूर्ण और असंगत है। एक गरीब व्यक्ति मोटर दुर्घटना मुआवजे या जमानत के लिए अदालत आता है, लेकिन कुछ मशहूर वकीलों की घंटों दलीलें देने की वजह से उसका केस नहीं लिया जाता और वह निराश लौट जाता है। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अब से कोई भी वकील मनमाने ढंग से घंटों दलील नहीं दे सकेगा।
लंबे समय से यह शिकायत आती रही है कि कुछ स्टार सीनियर वकील और कुछ एक्टिविस्ट वकील/याचिकाकर्ता घंटों दलील देकर या बार-बार पीआईएल दाखिल करते हैं, जिससे साधारण मुवक्कि लों के केस पीछे छूट जाते हैं। कई बार तो ऐसी याचिकाओं को तुरंत सूचीबद्ध न करने को आधार बनाकर जजों पर असंवेदनशीलता का आरोप तक लगा दिया जाता है। अब न्यायिक समय का न्यायसंगत वितरण होगा।
विधवा की 23 साल पुरानी
कहानी ने झकझोर दिया
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने एक मार्मिक घटना सुनाई। उन्होंने कहा- एक गरीब महिला के पति की रेलवे ट्रैक पर मृत्यु हो गई थी। मुआवजे के लिए उसने मुकदमा लड़ा। 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे 8 लाख रुपए मुआवजा दिया लेकिन तब तक वह न्याय व्यवस्था से इतनी निराश हो चुकी थी कि गुमनामी में खो गई थी। एक युवा वकील ने अतिरिक्त मेहनत कर उसे ढूंढ़ा। पता चला कि उसका बैंक खाता तक नहीं था। खाता खुलवाया गया और पैसा जमा किया गया। 23 साल बाद उसके चेहरे पर जो मुस्कान आई, वही न्याय व्यवस्था का असली काम है। हमें हर मुवक्कि ल के चेहरे पर समय से न्याय देकर मुस्कान लानी है।
नए नियम के तहत
हर वकील को अंतिम सुनवाई वाले मामलों में लिखित सबमिशन दाखिल करना अनिवार्य होगा।
उसमें स्पष्ट लिखना होगा कि वह अपनी मौखिक दलीलें कितने समय में पूरी करेगा।
अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामलों में कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा।













