ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।पर्यावरण संरक्षण हर देश के लिए अहम होता जा रहा है, इसीलिए ‘ग्रीन जॉब्स’ में विश्व स्तर पर तेजी आई है। ‘ग्रीन जॉब्स’ या हरित रोजगार, यानी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े तकनीकी, सामाजिक और नीतिगत कौशल क्षेत्र में 2030 तक करीब 2 करोड़ रोजगार सृजित होने का अनुमान है। नेट-जीरो कार्बन की दिशा में बढ़ते कदमों ने इनकी मांग बढ़ा दी है। इस उभरते क्षेत्र के लिए खुद को तैयार करें। वर्ष 2030 तक दुनिया में ग्रीन जॉब्स के 2 करोड़ से अधिक नए अवसर बनने की संभावना अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने जताई है।
‘ग्रीन जॉब्स’ का अर्थ है ऐसा काम, जो पर्यावरण संरक्षण और उसकी पुनर्स्थापना के लिए योगदान करता है। इसीलिए ‘ग्रीन जॉब्स’ का व्यापक विस्तार है। भारत में भी आने वाले कुछ सालों में ग्रीन एनर्जी सेक्टर में 30 लाख और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से 6 लाख नौकरियां बनने का अनुमान है। ये आंकड़े चताते हैं कि पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कौशल अब जॉब मार्केट का मजबूत आधार बन रहे हैं।
कौन से क्षेत्र शामिल
हरित कौशल का दायरा एग्रीकल्चर, मैन्यूफैक्चरिंग, कंजरवेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसे सेक्टर तक में फैला है। रिन्यूएबल एनर्जी, ईवी और बैटरी उद्योग, सस्टेनेबिलिटी, पर्यावरण, समाज और शासन, वेस्ट मैनेजमेंट, ग्रीन कंस्ट्रक्शन, अर्बन प्लानिंग-इन सभी क्षेत्रों में ग्रीन जॉब्स के लिए तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं। पढ़ाई कर रहे हैं, तो डिग्री के साथ रिन्यूएबल एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी से जुड़े इलेक्टिव कोर्स या सर्टिफिकेट जोड़ें। पेशेवर हैं, तो ईीएसजी, क्लाइमेट या रिन्यूएबल एनर्जी में शॉर्ट टर्म कोर्स कर सकते हैं।
कैसे करें शुरुआत
बारहवीं में विज्ञान और गणित विषय लेकर स्नातक स्तर पर बीटेक/ बीई (इलेक्टिकल, मैकेनिकल, एनवायरनमेंटल) व बीएससी (एन्वॉयरमेंटल साइंस) जैसे कोर्स को लक्ष्य करें। इससे अच्छी शुरुआत की संभावना बनती है। आगे एमटेक (रिन्यूएबल एनर्जी) कर सकते हैं या सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट में एमबीए जैसे विशेषज्ञता कोर्स लाभ देंगे। विभिन्न आईआईटी, जैसे कि आईआईटी हैदराबाद, बॉम्बे, मद्रास आदि से भी एनर्जी एंड एन्वॉयरमेंट मैनेजमेंट और एनर्जी ट्रांजिशन एंड सस्टेनिबिलिटी में एमटेक जैसे कोर्स किए जा सकते हैं। ये कोर्स रिन्यूएबल एनर्जी, पर्यावरण इंजीनियरिंग, सस्टेनेबल डिजाइन और क्लाइमेट चेंज जैसे विषयों पर केंद्रित हैं।
गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि के छात्र या पेशेवरों के लिए सस्टेनेबिलिटी, ईएसजी, ग्रीन फाइनेंस और क्लाइमेट पॉलिसी से जुड़े कोर्स/सर्टिफिकेशन हैं।
काम की डिग्री और पद
टेक डिग्री है, तो सोलर, विंड सिस्टम, ईवी, इलेक्ट्रिक ग्रिड और ग्रीन बिल्डिंग्स, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर की डिजाइनिंग, ईवी इंजीनियर, ग्रीन बिल्डिंग कंसल्टेंट जैसे पद विशेषज्ञता के अनुसार मिलेंगे।
बीकॉम, बीबीए, सीए, सीएस, एमबीए, इकोनॉमिक्स में डिग्री के लिए मैनेजमेंट, ईएसजी, फाइनेंस के क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन के आकलन, ईएसजी रिपोर्टिंग आदि से संबंधित काम में योग्य होंगे। ईएसजी एनालिस्ट, सस्टेनेबिलिटी मैनेजर, एनवायरनमेंटल कंसल्टेंट जैसे पद मिलेंगे।
पॉलिसी, सोशियोलॉजी की डिग्री: ऐसे युवा रिसर्च, सरकारी नीतियों, एनजीओ और क्लाइमेट प्रोजेक्ट्स आदि से जुड़े मौकों में जा सकते हैं। इसमें पॉलिसी एनालिस्ट, रिसर्चर, कंजर्वेशन ऑफिसर जैसे पद मिलेंगे।
आईटीआई, डिप्लोमा या शॉर्ट टर्म कोर्स: सोलर टेक्नीशियन, बैटरी टेक्नीशियन जैसे पद मिलेंगे।
विशेषज्ञ की राय
भारत में ‘ग्रीन जॉब्स’ की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024-2025 के बीच ग्रीन हायरिंग 7.7% बढ़ी, जो सामान्य जाब ग्रोथ से ज्यादा है। इस क्षेत्र में साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स, तीनों स्ट्रीम के छात्र करियर बना सकते हैं।
साइंस स्ट्रीम के लिए इंजीनियरिंग, टेक्निकल और एनर्जी सिस्टमा से जुड़े अवसर है, वहीं कॉमर्स/आर्ट्स के लिए पॉलिसी, मैनेजमेंट, फाइनेंस और रिसर्व की भूमिकाएं उपलब्ध है। तकनीकी ज्ञान, डाटा एनालिसिस, एआई / जीआईएस जैसे डिजिटल कौशल और सॉफ्ट स्किल्स काम आएंगे। यूपीएससी (आईएफएस, आईएएस में पर्यावरण से जुड़े पद), स्टेट पीएससी, कॉन्ट्रैक्ट आधारित सरकारी प्रोजेक्ट्स और स्किल इंडिया/एनएसडीसी सर्टिफिकेशन के जरिए आप सरकारी क्षेत्र में ग्रीन जॉब्स पा सकते हैं। इसके अलावा, स्थानीय कॉलेज से बीएससी एन्वायरनमेटल साइस जैसे कोर्स के जरिए भी इस क्षेत्र में मजबूत शुरुआत संभव है।
अपस्किलिंग के लिए कोर्सेरा और एडेक्स जैसे ऑनलाइन मंचों पर ईएसजी, क्लाइमेट चेंज, रिन्यूएबल एनर्जी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट से जुड़े कोर्स हैं। नेशनल प्रोग्राम ऑन टेक्नोलॉजी इन्हें आईआईटी द्वारा तैयार क्लाइमेट चेंज, एनर्जी इकोनॉमिक्स और ईएसजी जैसे निशुल्क सर्टिफिकेट कोर्स मिलते हैं।
प्रमुख संस्थान एवं कोर्स
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (एनआईएसई), सोलर सिस्टम डिजाइन, सोलर थर्मल सिस्टम्स से संबंधित प्रशिक्षण, nise.res.in/hiदिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली, एन्वॉयरमेंटल स्टडीज में एमए/एमएससी du.ac.in द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी), रिन्यूएबल एनर्जी, पर्यावरण विज्ञान से संबंधित पीजी डिप्लोमा और डिग्री कोर्स teriin.org टेरी इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, (टीईआरआई-एसएएस), रिन्यूएबल एनर्जी में एम.टेक, पीजी डिप्लोमा और एडवांस्ड पीजी डिप्लोमा, terisas.ac.in
वेतन कितना : फ्रेशर्स को औसतन 3-5 लाख रुपये सालाना शुरुआती पैकेज मिलता है। अनुभव के साथ यह 12-15 लाख रुपये या उससे अधिक तक जा सकता है।













