ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की कई योजनाएं हैं जिनमें लोन लेकर आप अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकते हैं। ऐसी ही एक योजना प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना है। इसके तहत पारंपरिक कला, शिल्प और कारीगरी जैसे राजमिस्त्री, दर्जी, मोची, बढ़ई, माला-बनाने जैसे कम आय वाले और पीढ़ियों से चली आ रही विरासतगत पेशों में लगे लोगों को पीछे नहीं रहने दिया जा रहा है।
योजना के पात्रता की शर्तें:—
लाभार्थी अपने हाथों एवं औजारों से काम करता हो
योजना में उल्लिखित परिवार आधारित 18 पारंपरिक पेशों में से किसी एक में काम करता हो
असंगठित क्षेत्र में शामिल हो अथवा स्वरोजगार के आधार पर
पंजीकरण तिथि पर न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए
अभ्यर्थी द्वारा इससे मिलती जुलती केंद्र/राज्य सरकार की किसी भी ऋण आधारित योजना के अंतर्गत कोई भी लोन इससे पहले स्वरोजगार/व्यापार विस्तार के लिए पिछले 5 वर्ष में नहीं लिया गया हो।
बता दें कि योजना के अंतर्गत लाभ परिवार के सिर्फ एक ही सदस्य तक सीमित रहेगा। योजना के अंतर्गत परिवार को पति, पत्नी एवं अविवाहित संतान के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके अलावा अभ्यर्थी/पारिवारिक सदस्य सरकारी सेवा में पदस्थ नहीं होना चाहिए।
लोन का इंतजाम
इस योजना के तहत पात्र कारीगरों को जमानत-मुक्त उद्यम ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे अपने व्यापार को बढ़ा सकें और महंगे सूदखोरों से मुक्त हो सकें। हर लाभार्थी को दो किस्तों में पैसे दिए जाते हैं। पहली किस्त ₹1 लाख 18 महीनों में और दूसरी ₹2 लाख 30 महीनों में दी जाती है, बशर्ते पहले प्रशिक्षण तथा डिजिटल लेनदेन की शर्तें पूर्ण हों। योजना के तहत ब्याज दर पर भी सरकार का सहयोग मिलता है। कारीगरों से मात्र 5% ब्याज लिया जाता है जबकि सरकार ब्याज में 8% तक का योगदान करती है, जिससे कुल कर्ज की लागत बेहद कम हो जाती है।
कारीगरों को डिजिटल लेनदेन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हर डिजिटल भुगतान पर उन्हें 1 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलता है, जो प्रति माह 100 लेनदेन तक मान्य है। कौशल प्रशिक्षण, पहचान-पत्र और उपकरण सहायता भी इस योजना के प्रमुख हिस्से हैं।

























