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उत्सव की तरह मना ‘परीक्षा पे चर्चा’ का नौवां संस्करण

by Blitz India Media
February 14, 2026
in Hindi Edition
0
The ninth edition of 'Pariksha Pe Charcha' was celebrated like a festival.
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। ‘परीक्षा पे चर्चा’ का 9वां संस्करण एक बड़े उत्सव की तरह मनाया गया। बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई चीजें दीं- पीएम मोदी का स्केच, हैंड मेड बुके, पहाड़ में बनने वाली डोलची, त्रिपुरा से कोकोनट की लकड़ी से बना सितार, ऑर्गेनिक चाय (इस पर पीएम मोदी ने कहा कि चायवाले को चाय दे रहे हैं) और असम का गमोछा। पीएम मोदी के इस कार्यक्रम में छात्रों ने जिंदगी से जुड़े कई अहम सवाल शेयर किए।
‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ में इस बात पर जोर दिया जा गया कि पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक शांति भी जरूरी है। पीएम मोदी बच्चों को ‘एग्जाम वॉरियर’ बनने की सलाह दी, जिसका मतलब है कि परीक्षा से डरना नहीं, बल्कि उसका बहादुरी से सामना करना है। पीएम मोदी की सलाह मानकर आप परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दे सकते हैं।
सपने सभी देखें
सपने सभी को देखने चाहिए, पर उन्हें पूरा करने के लिए कर्म प्रधान बनना भी जरूरी है। गहन रुचि, उत्साह और आत्मविश्वास इसके लिए फर्टिलाइजर का काम करते हैं। ‘परीक्षा पर चर्चा’ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के छात्रों का मार्गदर्शन कर उनके सपने सींचे।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई और खेल का समय व्यक्ति की रुचि और क्षमता के अनुसार होना चाहिए। साथ ही प्रधानमंत्री ने निजी जीवन में संतुलन बनाए रखते हुए दैनिक कार्यों को समझदारी से निभाने पर जोर दिया। उन्होंने व्यावसायिक ज्ञान से जुड़ी पुस्तकों के निरंतर अध्ययन की जरूरत बताते हुए कहा कि शिक्षा और कौशल एक-दूसरे के पूरक हैं। परीक्षा के प्रश्न पत्र को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बार छात्रों को लगता है कि प्रश्नपत्र बहुत कठिन है या पाठ्यक्रम से बाहर का है, जिससे वे घबरा जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र कभी भी पाठ्यक्रम से बाहर नहीं होता, बल्कि चयनित पाठ्यक्रम के सीमित अध्ययन के कारण विषय कठिन प्रतीत होता है। इसलिए सर्वांगीण अध्ययन पर फोकस करना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि केवल सुविधाएं क्षमता नहीं बढ़ातीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दिव्यांग छात्र आज अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि घर आए अतिथियों से उनकी सफलता की कहानियां सुनें- वे कैसे पढ़ते थे, उनका जीवन कैसा था- इससे उनके अनुभवों से सीख ली जा सकेगी। साथ ही उन्होंने सफल व्यक्तियों की जीवन-कथाओं से प्रेरणा लेने पर बल दिया, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और आगे बढ़ने की दिशा मिलती है।
इस दौरान ‘विकसित भारत’ के कॉन्सेप्ट पर भी विस्तृत चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी से तैयारी शुरू करनी होगी। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं के अधिक उपयोग, समय के सदुपयोग और साथियों के साथ सकारात्मक विचार-विमर्श को आवश्यक बताया। खेलों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल-कौशल का विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसे खेलों को बढ़ावा देना चाहिए जो बौद्धिक और नैतिक विकास करें। उन्होंने पंचतंत्र, अभिमन्यु जैसे पात्रों पर आधारित खेल विकसित करने की बात कही और समय की अनावश्यक बर्बादी करने वाले खेलों से सावधान रहने का संदेश दिया।
वैदिक गणित को उन्होंने रोचक और उपयोगी बताया। एआई पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका उपयोग विवेक और बुद्धि के साथ किया जाना चाहिए। यह खुले आकाश की तरह संभावनाओं से भरा है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने का माध्यम खुद मनुष्य की सोच, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण ही होता है। महात्मा गांधी ने जिस तरह 1913 में स्वतंत्र भारत का सपना देखा और भगत सिंह ने क्रांति का बीज बोया, जिसके परिणामस्वरूप 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई, उसी प्रकार आज से किए गए प्रयास ही 2047 के भारत का स्वरूप तय करेंगे। यह चर्चा अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ते हुए छात्रों के लिए प्रेरणादायक और बोधगम्य रही।
बच्चों में बनी पीएम मोदी की नई छवि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे स्टूडेंट्स को उनका व्यक्तित्व बहुत पसंद आया। इन बच्चों ने बताया कि पहले उन्हें लग रहा था कि पीएम बहुत गंभीर स्वभाव वाले होंगे लेकिन उनके सामने आते ही उनकी छवि बदल गई। बच्चों को पीएम मोदी हंसमुख और अपने से लगे।
किसे याद रहता है टॉपर का नाम?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा में चर्चा के दौरान कहा कि मार्क्स-मार्क्स बीमारी बन गए हैं। किसे पिछले साल के टॉपर का नाम याद रहता है? कुछ समय बाद लोग सब भूल जाते हैं।
परीक्षाएं कठिन क्यों लगती हैं?
पीएम मोदी ने कहा कि आप अक्सर 10 साल का पैटर्न ही फॉलो करते हैं। पहले आता था श्योर सजेशन, जरूरी सवाल, फिर 10 साल के पैटर्न से सवाल पूछे जाते हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ये बीमारी मेरे समय में भी थी। उन्होंने कहा कि इस बीमारी को फैलाने का काम कुछ शिक्षक भी करते हैं। उन्हें लगता है कि उनकी क्लास या स्कूल का रिजल्ट अच्छा हो। इसलिए वो जिससे नंबर मिले सिर्फ वही पढ़ाते हैं लेकिन अच्छे टीचर सर्वांगीण विकास के लिए पूरा सिलेबस पढ़ाते हैं, पूरे सिलेबस पर मेहनत करवाते हैं और उस सिलेबस का आपके जीवन में महत्व समझाते हैं।
नंबर को लक्ष्य मानना गलत
पीएम मोदी ने परीक्षा पे चर्चा में कहा कि परीक्षाएं खुद को एग्जामिन करने के लिए होती हैं। हमारा लक्ष्य परीक्षा के नंबर नहीं हो सकते हैं। हमारा गोल संपूर्ण जीवन का विकास होना चाहिए। हमें खुद को सीमित नहीं करना चाहिए। पीएम ने सभी विद्यार्थियों से आग्रह किया कि जिंदगी में सबसे ज्यादा उत्तम बनिए, जीवन अपना सर्वश्रेष्ठ बनाइए, अपना पूरा जीवन शानदार बनाए रखने के लिए जीवन को तैयार करना है। शिक्षा एक माध्यम है, इसी के आधार पर करना चाहिए।
आयुष तिवारी का सवाल- स्कूल में
टीचर्स की स्पीड कैसे मैच करें?
इस पर पीएम मोदी ने टीचर्स को सलाह देते हुए जवाब दिया कि जैसे किसान खेत को जोतता है, वैसे ही स्टूडेंट्स का मन जोतना चाहिए। इसका तरीका क्या है- मान लीजिए जनवरी के तीसरे हफ्ते में वो हिस्ट्री का पाठ पढ़ाने वाले हैं तो पहले हफ्ते में बता दें कि हिस्ट्री का ये पाठ पढ़ाएंगे। दूसरे सप्ताह में हिस्ट्री का ये पाठ पढ़ाएंगे। तीसरे सप्ताह में हिस्ट्री का ये पाठ पढ़ाएंगे। इस तरह से स्टूडेंट्स को पता रहेगा कि आने वाले तीसरे सप्ताह में उन्हें क्या पढ़ना है।

पीएम मोदी का संदेश छात्रों के लिए हौसला बढ़ाने वाला
रायन एडुनेशन एकेडमिक्स की वाइस प्रेसिडेंट निधि थापर के अनुसार, परीक्षाओं का समय करीब आते ही बच्चों और उनके परिवारों में तनाव बढ़ जाता है। ऐसे समय में ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का संदेश छात्रों के लिए हौसला बढ़ाने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि खुद को साबित करने और सीखने का एक मौका समझना चाहिए। यह बात बच्चों को बहुत राहत देती है कि जिंदगी सिर्फ अंकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है।
पीएम मोदी ने अनुशासन, ध्यान, मोबाइल और सोशल मीडिया के सही उपयोग और मानसिक संतुलन पर भी जोर दिया। इससे स्पष्ट होता है कि अच्छी पढ़ाई के लिए मन का मजबूत और पॉजिटिव होना बहुत जरूरी है। नमिता थापर ने बताया कि रायन में भी इसी सोच के साथ काम किया जाता है। यहां बच्चों को सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि उनके पूरे व्यक्तित्व के विकास में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ हर चुनौती का सामना कर सकें।

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