ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन के लिए जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (आईटी-जेईई) देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों युवा इंजीनियरिंग में बेहतर करियर के लिए जेईई मेन्स देते हैं। इनमें से सिर्फ टॉप 2.50 लाख युवाओं को जेईई एडवांस्ड देने का मौका मिलता है और तब जाकर कहीं आईआईटी में एडमिशन होता है। मुंबई के गरीब परिवार से आने वाले हर्ष गुप्ता के लिए यह इतना आसान नहीं था।
11वीं क्लास में फेल होने के बाद लोग ताने मारने लगे थे। फिर भी हर्ष ने हार नहीं मानी और पिता के साथ पानीपुरी की दुकान लगाते हुए न सिर्फ जेईई एग्जाम क्रैक किया बल्कि मनपसंद आईआईटी में सीट हासिल की। यह सक्सेस स्टोरी हर्ष के दृढ़ संकल्प और संघर्ष की है, जो आर्थिक तंगी के बावजूद बड़े सपने देख रहे युवाओं को मोटिवेट कर सकती है।
हर्ष ने गरीबी करीब से देखी है। बहुत कम उम्र में पढ़ाई की वैल्यू पता चल गई थी। इसलिए 11वीं में फेल होने के बाद, फिर से तैयारी की और न सिर्फ 11वीं बल्कि 12वीं क्लास में भी अच्छे अंकों से पास हुए। यह वो दौर था जब हर्ष सड़क पर पिता के साथ पानीपुरी के ठेले पर मदद भी करते थे और पढ़ाई भी करते थे।
10 से 12 घंटे की जेईई मेन्स की प्रिपरेशन
हर्ष ने देश का सबसे टफ एग्जाम क्रैक करने में पूरी ताकत झोंक दी। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कोचिंग और सेल्फ स्टडी मिलाकर वे 10 से 12 घंटे जेईई मेन्स की तैयारी करते थे। पहली बार हर्ष अपनी खराब हेल्थ और बुआ के निधन की वजह से जेईई मेन्स नहीं दे पाए थे। 2024 में पहली बार जेईई मेन्स में बैठे और 98.5 पर्सेंटाइल हासिल की और जेईई एडवांस्ड भी क्वालीफाई कर लिया।
मनपसंद आईआईटी के लिए दिया दूसरी बार दिया जेईई
पहले अटेंप्ट में जेईई मेन्स और जेईई एडवांस्ड क्वालीफाई करने के बाद भी हर्ष को अपने मनपसंद आईआईटी में एडमिशन नहीं मिल पाया। इस वजह से उन्होंने फिर से एग्जाम दिया और अच्छे मार्क्स के साथ आईआईटी रुड़की में सीट हासिल की। अपनी सफलता को लेकर हर्ष कहते हैं, ‘मैं कक्षा 11 में फेल हुआ था, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी।
लोगों ने ताने मारे, मगर मैंने कान बंद कर लिए और किताबें खोल दीं। दिन में 10–12 घंटे पढ़ाई, कोचिंग के साथ सेल्फ स्टडी, और सिर्फ एक ही लक्ष्य सामने रखा- आईआईटी में एडमिशन।
























