ब्लिट्ज ब्यूरो
चेन्नई के रहने वाले ए.आर. राजा मोहिदीन ने इस वर्ष संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में आॅल इंडिया रैंक 7 हासिल कर शानदार सफलता पाई है। मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा का रास्ता चुना और चार वर्षों की निरंतर तैयारी, स्पष्ट लक्ष्य और कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया। प्रस्तुत हैं ब्लिट्ज इंडिया के लिए रईस अहमद ‘लाली’ की उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
रिजल्ट के बाद आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
सच कहूं तो मैं पूरी तरह चौंक गया था। मुझे उम्मीद थी कि मेरा चयन हो सकता है, लेकिन टॉप 10 में, वह भी सिंगल डिजिट रैंक मिलेगी- यह सोचा नहीं था। खुशी भी थी, लेकिन यकीन करने में थोड़ा समय लगा।
आपने यूपीएससी की तैयारी कब शुरू की और कितने साल लगे?
मैंने 2022 में तैयारी शुरू की थी। अब इसे चार साल हो चुके हैं। यह सफर लंबा था, लेकिन मैं लगातार मेहनत करता रहा।
जामिया की कोचिंग का आपकी सफलता में कितना योगदान रहा?
पहले एक साल मैंने चेन्नई में तैयारी की, लेकिन 2023 में प्रीलिम्स पास नहीं कर पाया। इसके बाद मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी की प्रवेश परीक्षा दी और चयन हो गया। दिल्ली आने के बाद पढ़ाई के लिए बहुत अच्छा माहौल मिला। प्रोफेसर समीना बानो मैम और अन्य शिक्षकों ने काफी मार्गदर्शन दिया। यहां की लाइब्रेरी, अखबार और सीनियर्स का सहयोग बहुत मददगार रहा। सीनियर्स ने मेरी गलतियां पहचानने और सुधारने में अहम भूमिका निभाई।
पहले प्रयास में क्या कमी रह गई थी?
पहले प्रयास में मैं प्रीलिम्स क्लियर नहीं कर पाया। मैंने मॉक टेस्ट की पर्याप्त प्रैक्टिस नहीं की थी। हालांकि, उसी समय मैं मेंस की तैयारी भी करता रहा। मेंस की लगातार तैयारी का फायदा इस बार मिला और अच्छे अंक आए।
आपके विषय कौन-कौन से थे?
जनरल स्टडीज तो सभी के लिए समान होता है। मेरा आॅप्शनल विषय एंथ्रोपोलॉजी था।
आप एमबीबीएस डॉक्टर हैं। फिर सिविल सेवा में आने का फैसला क्यों लिया?
मैंने गवर्नमेंट कुड्डालोर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस से किया। मेरी मेडिकल पढ़ाई 2016 में शुरू हुई और 2022में पूरी हुई। शुरूआत में सिविल सेवा में आने की कोई योजना नहीं थी। लेकिन, इंटर्नशिप के दौरान ही कोविड-19 महामारी का समय था। मैंने अपने शहर में सिविल सेवकों को लोगों के लिए दिन-रात काम करते देखा। वहीं से प्रेरणा मिली। मुझे लगा कि एक सिविल सेवक के रूप में मैं समाज के बड़े वर्ग की सेवा कर सकता हूं। इसी सोच ने मुझे ग्रेजुएशन के बाद यूपीएससी की तैयारी के लिए प्रेरित किया।
आपके माता-पिता क्या करते हैं?
मेरे माता-पिता शिक्षक रहे हैं और फिलहाल तमिलनाडु के सरकारी कॉलेजों में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं।
सफलता का मूल मंत्र क्या रहा?
लक्ष्य की स्पष्टता, नियमित तैयारी, सिलेबस पर पकड़ और मानसिक संतुलन- यही मेरी सफलता की कुंजी रहे।
रोज कितने घंटे पढ़ाई करनी चाहिए?
मेरे हिसाब से घंटों की गिनती उतनी मायने नहीं रखती। जरूरी यह है कि आप अपना तय लक्ष्य पूरा करें। महीने और हफ्ते का टारगेट बनाएं और उसे हर हाल में पूरा करें। कुछ दिन मैंने पांच घंटे पढ़ाई की, कुछ दिन दस घंटे, लेकिन टारगेट पूरा किया।
जो छात्र यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
सबसे जरूरी है कि आपका लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। हमेशा याद रखें कि आपने यह परीक्षा क्यों चुनी है। यह सफर लंबा हो सकता है- मुझे चार साल लगे। इस दौरान मानसिक मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। दूसरी अहम बात है सिलेबस पर फोकस बनाए रखना। तैयारी बिखरी हुई नहीं होनी चाहिए।












