ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का पिछले दिनों हुआ भारत का दौरा सिर्फ कुछ फाइलों पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं रहा। यह दौरा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पश्चिमी देश अब भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, 6 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त ताकत और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर गहरा विश्वास जता रहे हैं। जब एक तरफ ग्लोबल सप्लाई चेन संकट में है तब भारत और कनाडा के एक साथ आने से बहुत कुछ बदलने वाला है।
भारत और कनाडा ने ईरान संकट पर कूटनीतिक चर्चा के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। दोनों देश साल के अंत तक मुक्त व्यापार समझौता करने और 2030 तक व्यापार 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
– जो काम 8 साल में नहीं हुआ वो कार्नी ने दिल्ली आकर 2 दिन में किया
जिस समय मिडिल ईस्ट में संग्राम मचा हुआ है, ठीक उसी समय भारत में एक अलग ही डील हो रही थी। भारत की यात्रा पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कड़वाहट भूल रिश्तों की नई इबारत लिख रहे थे। विदेश मंत्रालय के सचिव पी कुमारन के शब्दों में कहें तो गत आठ वर्षों में जो नहीं हुआ, वह इन दो दिनों में हो गया है। कनाडा ने भारत के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है। वह हमें यूरेनियम देगा तो क्रिटिकल मिनरल्स भी। भारी इन्वेस्टमेंट भी करेगा तो हमारे लोगों के लिए नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।
इंडिया-कनाडा सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, जब भारत और कनाडा एक साथ खड़े होते हैं तो वे सिर्फ दो अर्थव्यवस्थाओं को नहीं जोड़ते बल्कि पूंजी और क्षमता को मिलाकर एक आर्थिक शक्ति बनाते हैं। हम क्लीन एनर्जी पर साथ काम करने जा रहे हैं तो क्रिटिकल मिनरल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी हम साथ हैं।







