ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में चीन की करेंसी युआन का बढ़ता दबदबा अमेरिका को परेशान कर रहा है। अब अमेरिकी सीनेटरों के एक समूह ने अमेरिकी डॉलर को दुनिया की रिजर्व करेंसी का दर्जा देने के लिए एक प्रस्ताव फिर से पेश किया है। सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि चीन, युआन के आस-पास एक दूसरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था बनाने की कोशिशें तेज कर रहा है। अमेरिकी सीनेटर्स के इस समूह में दोनों दलों के सांसद शामिल हैं। टेड बड और जीन शाहीन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि युआन को अंतरराष्ट्रीय बनाने की बीजिंग की कोशिश से अमेरिका और उसके साथियों के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा है।
अमेरिकी सांसदों ने क्या कहा?
प्रस्ताव के साथ जारी एक बयान में बड ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगातार सहयोग और लगातार सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिकी डॉलर ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर अपना स्टेटस बनाए रखे।’ उन्होंने कहा, ‘वर्षों से, चीन, अमेरिका और हमारे साझेदारों की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को निशाना बनाते हुए अपने वैश्विक वित्तीय असर को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।’
बड ने चेतावनी दी कि चीन को ‘ग्लोबल करेंसी फ्लो को बढ़ाने और दूसरा फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की इजाजत देना नीति की विफलता होगी जो दुनिया की अर्थव्यवस्था को विभाजित कर सकता है। इससे फ्री मार्केट की लगातार ग्रोथ को खतरा हो सकता है, खासकर विकासशील देशों में।’ उन्होंने कहा, अमेरिकी डॉलर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिरता और खुशहाली लाने वाली भूमिका बनाए रखनी चाहिए।
शाहीन ने कहा कि डॉलर का दबदबा सीधे तौर पर अमेरिकी आर्थिक ताकत और ग्लोबल असर से जुड़ा है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी डॉलर को ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर बनाए रखना न सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था की लंबे समय की स्थिरता और खुशहाली के लिए जरूरी है, बल्कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए भी बहुत जरूरी है।’













