ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। रूस अब भारत का सबसे बड़ा फर्टिलाइजर सप्लायर है। दोनों देशों के बीच फर्टिलाइजर ट्रेड 40% बढ़कर ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया है। नई दिल्ली ने 2025 में 3.02 अरब डॉलर का रूसी फर्टिलाइजर इम्पोर्ट किया। यह पिछले साल के मुकाबले 1.8 गुना ज्यादा है। वॉल्यूम 65 लाख टन तक पहुंच गया। इस तरह रूस ने भारत का एक बड़ा संकट भी टाल दिया। अगर मॉस्को से इतनी बड़ी मात्रा में फर्टिलाइजर निर्यात न होता तो चीन के चलते हालात बिगड़ने की आशंका थी। दरअसल, चीन ने पिछले साल 15 अक्टूबर से यूरिया, डीएपी और टीएमएपी सरीखे प्रमुख उर्वरकों के एक्सपोर्ट पर दोबारा रोक लगा दी थी। इस सप्लाई संकट को रूस ने टाल दिया।
स्पूतनिक इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उसने बताया कि भारत-रूस के फर्टिलाइजर ट्रेड में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। यह 40 फीसदी बढ़ा है। पिछले साल भारत ने रूस से 3.02 अरब डॉलर का उर्वरक आयात किया। मात्रा में यह 65 लाख टन है।
फॉस्फेट और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर लगभग दोगुने हो गए। नाइट्रोजन-बेस्ड फर्टिलाइज़र लगभग 25% बढ़े। पोटाश वॉल्यूम थोड़ा बढ़ा।
हाल के सालों में भारत का रूस से फर्टिलाइजर आयात बढ़ा है। रूसी कंपनियां भारत में बढ़ते घरेलू प्रोडक्शन और मिडिल ईस्ट के प्रोड्यूसर्स से कड़े कॉम्पिटिशन के बावजूद अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब हैं।
चीन के इस कदम ने चौंकाया था
रूस से फर्टिलाइजर सप्लाई में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई जब चीन ने 15 अक्टूबर 2025 से यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), टेक्निकल मोनोअमोनियम फॉस्फेट (टीएमएपी) और एबल्यू के निर्यात पर रोक लगा दी। भारत अपनी विशेष उर्वरक जरूरतों का 95% हिस्सा चीन से आयात करता है। वैकल्पिक इंतजाम के तहत रूस से आयात का विकल्प तलाशा गया।
रूसी इंडस्ट्री और ट्रेड मिनिस्ट्री (मिनप्रोमटॉर्ग) के मुताबिक, रूस और भारत के बीच रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं। वे सबसे बढ़कर, दोनों देशों की कंपनियों के बीच केमिकल प्रोडक्ट्स के टर्नओवर में हुई अच्छी-खासी बढ़ोतरी पर जोर देते हैं। इस साल जनवरी में पिछले साल इसी समय के मुकाबले 10% ज्यादा है।













