ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’
इन पंक्तियों को सच कर दिखाया है एक ऐसे नौजवान ने, जिसके पास न तो सुख-सुविधाएं थीं और न ही आर्थिक मजबूती, लेकिन उसके पास था तो बस अटूट आत्मविश्वास और कुछ कर गुजरने का जज्बा। डोंगरे रेवैया ने साल 2022 की यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की और कुल 1000 सफल उम्मीदवारों में से 410वीं रैंक प्राप्त की। अब वे एक आईएएस अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं एक ऐसे होनहार छात्र की, जिसने अभावों के बीच पलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा पास की है। इस छात्र की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उसकी मां स्कूल में मिड-डे मील बनाने का काम करती हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा की दहलीज तक पहुंचने का यह सफर हर उस युवा के लिए सबक है जो मुश्किलों से घबरा जाते हैं।
बचपन से ही था पढ़ाई का जुनून
इस छात्र का जीवन संघर्षों की एक खुली किताब रहा है। पिता की कम आय और घर की तंगहाली के बीच उसकी मां ने स्कूलों में बच्चों के लिए खाना बनाकर अपने बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया। मां ने खुद भले ही मुश्किलें झेलीं, लेकिन बेटे की आंखों में कभी आंसू नहीं आने दिए और हमेशा उसे ऊंचे सपने देखने के लिए प्रेरित किया। छात्र ने भी अपनी मां के पसीने की हर बूंद की कीमत समझी और अपनी पूरी ताकत पढ़ाई में झोंक दी।
यूपीएससी क्रैक करने से पहले इस प्रतिभाशाली युवा ने अपनी तकनीकी योग्यता को भी साबित किया था। उसने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा ‘गेट’ को न केवल पास किया, बल्कि उसमें शानदार रैंक भी हासिल की। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के रास्ते खुले होने के बावजूद, उसका दिल हमेशा से देश की सेवा करने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की मदद करने के लिए धड़कता था। यही कारण था कि उसने एक सुरक्षित करियर के बजाय ‘कांटों भरे’ सिविल सेवा के रास्ते को चुना। उसने अपनी इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि और ‘गेट’ की तैयारी के दौरान विकसित किए गए अनुशासन को यूपीएससी की पढ़ाई में आधार बनाया।
बिना बड़े संसाधनों के की तैयारी
आजकल जहां लोग लाखों रुपये खर्च कर दिल्ली जैसे शहरों में कोचिंग लेते हैं, इस छात्र ने साबित किया कि अगर संकल्प पक्का हो, तो सीमित संसाधनों में भी जीत हासिल की जा सकती है। उसने इंटरनेट का सही उपयोग किया, लाइब्रेरी में घंटों वक्त बिताया और पुराने टॉपर्स के अनुभवों से सीखा। उसकी दिनचर्या में पढ़ाई के अलावा कुछ नहीं था।
मां के लिए सबसे बड़ा तोहफा
जब यूपीएससी का रिजल्ट आया और इस छात्र का नाम लिस्ट में दिखा, तो उसकी मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सालों तक दूसरों के बच्चों के लिए खाना बनाने वाली उस मां के लिए यह पल दुनिया की सारी दौलत से बढ़कर था। छात्र का कहना है, मेरी सफलता मेरी मां के संघर्षों का प्रतिफल है।













