राजेश दुबे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजनों की मदद के लिए बेहतर इंतजाम करने की जरूरत पर जोर दिया हझ। कोर्ट ने कहा कि कैब ड्राइवर सेवाओं को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि उनमें व्हीलचेयर और अन्य सहायक डिवाइस रखने की सुविधा हो। जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली बेंच दिव्यांगजनों के लिए फर्स्ट-माइल और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
बेंच ने कहा कि आज बड़े शहरों में हर जगह कैब ड्राइवर उपलब्ध है, इसलिए कैब कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे दिव्यांगजनों की व्हील
चेयर और अन्य सहायक डिवाइस को समायोजित करें।
कर सकें। कोर्ट ने दिव्यांगजनों के लिए विशेष कैब की व्यवस्था करने का भी सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि कैच एप में ऐसे विकल्प हो सकते हैं, जहां से दिव्यांगजनों के लिए खास तौर पर डिजाइन की गई कैब बुक की जा सके। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि दिव्यांगजनों को कैब में चढ़ने में काफी दिक्क त होती है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर कैब सीएनजी किट वाली होती है, जिससे गाड़ी में जगह कम हो जाती है और व्हीलचेयर रखने की सुविधा नहीं मिलती। उन्होंने यूरोपीय संघों की तरह यूनिवर्सल डिजाइन लागू करने का सुझाव भी दिया।
इस पर बेंच ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि अगर किसी व्यक्ति का घर मुख्य सड़क से एक किलोमीटर दूर है और वह ऑटोमेटिक व्हीलचेयर पर आता है, लेकिन उसे कैब में नहीं रख सकता, तो वह क्या करेगा। केंद्र सरकार के वकील ने बताया कि इन मुद्दों की समीक्षा संबंधित डिपार्टमेंट द्वारा की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह के मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक कमिटी बना चुका है।
– कोर्ट ने फर्स्ट माइल और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर जताई चिंता
– दिव्यांगों के लिए खास कैब और एप में अलग विकल्प का सुझाव
बेंच ने कहा कि इस याचिका में उठाए गए मुद्दों पर भी वही कमिटी विचार कर सकती है। हालांकि याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनका मामला अलग है।













