ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इस संबोधन का एक निहितार्थ यह भी है कि आगामी चुनावों के मद्देनजर महिलाओं को यह बताना था कि बीजेपी महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है जबकि विपक्ष इसके खिलाफ।
नारी शक्ति की उड़ान को रोकने की रची साजिश
अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कुछ इस तरह से अपनी बातें रखीं। उन्होंने कहा कि आज मैं बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर देश की माताओं, बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं। भारत का हर नागरिक आज देख रहा है कि कैसे नारी शक्ति की उड़ान को रोकने की साजिश रची गई है। हमारे भरसक प्रयासों के बाद भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया। मैं इसके लिए देश की सभी माताओं और बहनों से हृदय से क्षमाप्रार्थी हूं। मेरे लिए हमेशा देश हित सर्वोपरि रहा है, लेकिन कुछ लोगों के लिए दलहित ही सब कुछ हो जाता है। जब राजनीति में दलहित देश हित से बड़ा हो जाता है, तो उसका खामियाजा नारी शक्ति को भुगतना पड़ता है।
नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती
कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का भारी नुकसान देश की महिलाओं को उठाना पड़ा है। कल जब पूरा देश संसद की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा था, तब इन परिवारवादी पार्टियों ने महिला आरक्षण के प्रस्ताव को गिरा दिया। मुझे यह देखकर गहरा दुख हुआ कि बिल गिरते ही ये लोग खुशी से मेजें थपथपा रहे थे। यह केवल संसद की मेज पर थाप नहीं थी बल्कि देश की नारी के स्वाभिमान और आत्मसम्मान पर गहरी चोट थी। नारी सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान वह कभी नहीं भूलती है।

दल नारी शक्ति को ‘फॉर ग्रांटेड’ न लें
संसद में कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने जो व्यवहार किया है, उसकी कसक हर नारी के मन में हमेशा बनी रहेगी। अब जब भी ये नेता अपने क्षेत्रों में जाएंगे, महिलाएं याद रखेंगी कि इन्हीं लोगों ने उनके हक को रोका था। जो दल नारी शक्ति को ‘फॉर ग्रांटेड’ ले रहे हैं, वे बड़ी भूल कर रहे हैं। 21वीं सदी की नारी देश की हर राजनीतिक घटना पर पैनी नजर रख रही है। वह इन दलों की मंशा को भांप चुकी है और सच्चाई भी जानती है। महिला आरक्षण का विरोध करके विपक्ष ने जो पाप किया है, उसकी सजा उन्हें जनता जरूर देगी।
महायज्ञ में डाली बाधा
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 40 साल से लटके हुए महिलाओं के हक को 2029 के लोकसभा चुनाव से दिलाने का एक पवित्र प्रयास था। यह 21वीं सदी की नारी को नई उड़ान देने और उनके रास्ते की बाधाएं हटाने का एक महायज्ञ था। सरकार चाहती थी कि आधी आबादी को उनका अधिकार मिले और वे भारत की विकास यात्रा में बराबर की सहयात्री बनें। यह संशोधन समय की मांग थी, जिससे उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के हर राज्य की नारी शक्ति के सम्मान में वृद्धि होती।
कांग्रेस और सपा नारी शक्ति की गुनहगार
प्रधानमंत्री मोदी ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने इस बिल की ‘भ्रूणहत्या’ कर दी है। ये पार्टियां इस कृत्य के लिए देश के संविधान और नारी शक्ति की गुनहगार हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी शुरू से ही महिला आरक्षण के विषय से नफरत करती रही हैं। उन्होंने इसे रोकने के लिए पहले भी कई बार रोड़े अटकाए हैं। इस बार भी कांग्रेस ने संख्या बल और तकनीकी पेचों को लेकर नए-नए झूठ फैलाए और देश को गुमराह करने की नाकाम कोशिश की है।
विपक्ष ने अपना मुखौटा उतारा
विपक्ष ने विरोध करके अपना मुखौटा उतार दिया है। मुझे आशा थी कि शायद कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेगी, लेकिन उसने इतिहास रचने का सुनहरा अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है और परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के सहारे जिंदा है। इन परिवारवादी पार्टियों को डर है कि अगर महिलाएं सशक्त हो गईं ंतो उनका राजनीतिक नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। वे कभी नहीं चाहते कि उनके परिवार की महिलाओं के अलावा कोई और आगे बढ़े।
कांग्रेस आज भी ‘बांटो और राज करो’की नीति पर
कांग्रेस आज भी अंग्रेजों की ‘बांटो और राज करो’की नीति पर चल रही है। उन्होंने देश में हमेशा दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है। यह झूठ फैलाया गया कि परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा जबकि सरकार ने स्पष्ट किया था कि किसी भी राज्य की भागीदारी का अनुपात नहीं बदलेगा। डीएमके और टीएमसी जैसे दलों के पास मौका था कि वे अपने राज्यों से ज्यादा महिलाओं को सांसद बना सकें लेकिन स्वार्थ में उन्होंने यह मौका गंवा दिया। सपा ने तो लोहिया के सपनों को ही अपने पैरों तले रौंद दिया है।
कांग्रेस विकसित भारत के खिलाफ
इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस हमेशा से एक एंटी-रिफॉर्म पार्टी रही है। विकसित भारत के लिए जो भी निर्णय जरूरी होते हैं, कांग्रेस उन सबका विरोध करती है। इन्होंने जनधन योजना, आधार, मोबाइल क्रांति और डिजिटल पेमेंट तक का विरोध किया था। कांग्रेस ने ही ट्रिपल तलाक कानून, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण और यूसीसी का विरोध किया है। रिफॉर्म का नाम सुनते ही कांग्रेस विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है।
विपक्ष ने किया अपमान
कांग्रेस की नीति हमेशा से ‘लटकाना, अटकाना और भटकाना’रही है। इसी वर्क कल्चर की वजह से भारत उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, जिसका वह हकदार था। इन्होंने पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवादों को लटकाया और पाक के साथ पानी बंटवारे जैसे मुद्दों को उलझाए रखा। आज जब देश वन नेशन वन इलेक्शन और सीएए जैसे कड़े फैसलों के साथ आगे बढ़ रहा है, तो कांग्रेस अफवाह फैलाकर बवंडर खड़ा करने की कोशिश कर रही है। देश अब इस नकारात्मक राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगा। पीएम ने कहा कि विपक्ष ने मेज थपथपाकर नारी शक्ति का सीधा अपमान किया है।
अगले चुनाव में 33% आरक्षण का वादा
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को अगले लोकसभा चुनाव से ही 33% आरक्षण दिलाना था जिसे परिसीमन से जोड़कर लागू किया जाना था।
परिसीमन पर रुख
सरकार ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) को महिला आरक्षण के साथ जोड़कर यह संदेश दिया है कि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा और 33% सीटें बढ़ेंगी न कि मौजूदा सीटें कम होंगी।













