दीपक सहगल
नई दिल्ली। समुद्र की लहरों और रोमांचक जीवनशैली की ओर आकर्षित युवाओं के लिए मरीन इंजीनियरिंग एक ऐसा करिअर है, जो न केवल सम्मानजनक है बल्कि अवसरों से भी भरपूर है। आज दुनिया का लगभग अस्सी से नब्बे फीसद व्यापार समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है, इसलिए जहाजों का निर्माण, संचालन और रखरखाव अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। इस पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी मरीन इंजीनियरों के कंधों पर होती है, जो इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
मरीन इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग की वह शाखा है, जिसमें जलपोतों के निर्माण, उनकी मशीनों के रखरखाव, मरम्मत और संचालन से जुड़े कार्य किए जाते हैं। आधुनिक जहाज अत्याधुनिक तकनीकों और जटिल यंत्रों से लैस होते हैं, जिन्हें कुशलता से संचालित करने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। मरीन इंजीनियर जहाजों में लगे डीजल इंजन, भाप टरबाइन और गैस टरबाइन जैसी मशीनों का चयन, निर्माण और संचालन सुनिश्चित करते हैं। साथ ही वे यांत्रिक, विद्युत और नियंत्रण तंत्र की रूपरेखा भी तैयार करते हैं। जहाज पर मुख्य मरीन इंजीनियर पूरे तंत्र और माल की सुरक्षा का प्रमुख जिम्मेदार होता है। यह क्षेत्र केवल जहाजों तक सीमित नहीं
तेल और गैस के समुद्री मंचों के निर्माण, पाइपलाइन व्यवस्था और शोध कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई बार उन्हें जहाजों और समुद्री परियोजनाओं का निरीक्षण करने, सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन करने और तकनीकी सलाह देने का कार्य भी करना पड़ता है। इस पेशे में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता अत्यंत जरूरी होती है।
शैक्षिक योग्यता: मरीन इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को बारहवीं कक्षा भौतिकी, रसायन और गणित विषयों के साथ कम से कम पचास फीसद अंकों से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। आयु सामान्यतः सत्र आरंभ तक सत्रह से पच्चीस वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके बाद संबंधित प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। स्नातक पाठ्यक्रम सामान्यतः चार वर्ष का होता है, जिसमें जहाजों की मशीनरी, संचालन, रखरखाव और स्वचालन से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाती है।
वेतनमान : मरीन इंजीनियरिंग में वेतन काफी आकर्षक होता है। शुरुआती स्तर पर मासिक आय लगभग पच्चीस हजार से अस्सी हजार रुपए तक हो सकती है। अनुभव बढ़ने के साथ यह आय एक लाख से तीन लाख रुपए प्रतिमाह तक पहुंच जाती है। वरिष्ठ पदों पर इंजीनियरों का वेतन 5 लाख से 10 लाख या उससे अधिक हो सकता है।
संभावनाएं : मरीन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करिअर के अनेक रास्ते खुले हैं। युवा जहाजों पर मरीन इंजीनियर के रूप में कार्य कर सकते हैं। नौसेना, व्यापारिक जहाज सेवा, जहाज निर्माण कंपनियों, बंदरगाह प्राधिकरणों और निरीक्षण संस्थानों में भी रोजगार के अवसर मिलते हैं। समुद्री तेल और गैस परियोजनाओं, अनुसंधान कार्य, पर्यावरण संरक्षण और परिवहन व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में भी इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की मांग बनी रहती है।
प्रमुख संस्थान
इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी
नेशनल इंस्टीट्यूट आफ ओशनोग्राफी, गोवा
इंडियन मैरीटाइम विश्वविद्यालय, चेन्नई
इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पोर्ट मैनेजमेंट, कोलकाता
महाराष्ट्र एकेडमी आफ नेवल एजुकेशन, पुणे
कोचीन यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी, केरल
हिंद इंस्टीट्यूट आफ नाटिकल साइंस एंड इंजीनियरिंग, अलीगढ़













