नई दिल्ली। कभी-कभी जिंदगी इंसान को ऐसे मोड़ पर छोड़ देती है, जहां न आगे का रास्ता साफ दिखता है और न पीछे लौटने की हिम्मत बचती है। हर सुबह नई उम्मीद के साथ होती है लेकिन रात अपने ही सवालों का बोझ बढ़ा देती है। ऐसी ही संघर्षभरी कहानी है तस्कीन खान की। एक समय था जब उनके पास कोचिंग की फीस के लिए पैसे नहीं थे। घर की आर्थिक स्थिति को लेकर वह हर रोज अपने आप को कोसती रहती थीं। फिर एक दिन लिए गए फैसले से उन्होंने किस्मत बदलने की ठान ली। लगातार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता दिलाई और आज वह भारतीय रेलवे में अफसर हैं। आइए जानें कैसे उनकी सक्सेस स्टोरी लोगों को आगे बढ़ने का हौसला देती है।
बचपन से देखा संघर्ष, ट्यूशन पढ़ाकर निकाला खर्च
तस्कीन खान मूल रूप से उत्तराखंड के देहरादून की हैं। उन्होंने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि बचपन से संघर्ष देखा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने घर पर ट्यूशन पढ़ना शुरू किया जिससे अपनी पढ़ाई का खर्च निकल सके। हालांकि, उनकी मंजिल कुछ और थी और हमेशा उन्होंने आगे बढ़ने का सपना ही देखा। कठिन हालातों में भी उन्होंने खुद को मजबूत बनाए रखा और जीवन में कुछ बड़ा करने की ठान ली।
परिवार का सहारा न बन पाने के कारण खुद को रोज कोसती थीं तस्कीन
वह बताती हैं कि घर की बड़ी बेटी होने के कारण उन पर परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गई थीं। 2018 में उनका परिवार मेरठ आ गया था, इसके बाद स्थिति ज्यादा कठिन हो गई। उन्होंने कई यूपीपीएससी और यूकेपीसीएस सहित कई गवर्मेंट जाॅब के लिए एग्जाम दिए थे लेकिन असफलता मिली। इस दौरान वह हर रोज कहीं न कहीं खुद को कोसती थीं कि वह क्यों अपने परिवारवालों का सहारा नहीं बन पा रही हैं।
ऐसे शुरू की यूपीएससी की जर्नी
एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म से यूपीएससी के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसकी तैयारी का फैसला किया और इसे अपना लक्ष्य बना लिया। 2019 से उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ तैयारी शुरू की। स्कॉलरशिप हासिल करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से कोचिंग ली। शुरुआती असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी गलतियों को सुधारते हुए आगे बढ़ती रहीं।
3 बार यूपीएससी में असफलताओं के बाद भी नहीं हारी हिम्मत
यूपीएससी की तैयारी के दौरान कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। शुरुआती दौर में उन्हें लगातार 3 बार प्रारंभिक परीक्षा में असफलता मिली थी। जब रिजल्ट मन के मुताबिक नहीं था तो रोना आता था। इस दौरान अकेलापन और तनाव इतना बढ़ गया कि जीवन कठिन लगने लगा, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और हिम्मत नहीं हारी क्योंकि आगे बढ़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प ही नहीं था।
यूपीएससी में सफलता और रेल प्रबंधन सेवा में अधिकारी की पहचान
अपने चौथे प्रयास में तस्कीन खान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में ऑल इंडिया 736वीं रैंक हासिल की। परीक्षा से ठीक पहले पिता की तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। उनकी यह सफलता मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास का परिणाम है। आज वे भारतीय रेल प्रबंधन सेवा (आईआरएमएस) में एक बड़ी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।













