ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को केवल इस आधार पर प्रमोशन का अधिकार नहीं मिल जाता कि पद पुराने सेवा नियमों के समय खाली हुए थे। अदालत ने साफ किया कि सरकार के पास प्रशासनिक और नीतिगत सुधारों के तहत चयन प्रक्रिया में बदलाव करने की पूरी शक्ति है, बशर्ते यह फैसला मनमाना न हो।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को प्रमोशन का कोई ‘निहित अधिकार’ या वैध अपेक्षा प्राप्त नहीं है। चयन और भर्ती की प्रक्रिया तय करना पूरी तरह से सरकार के नीतिगत फैसले का हिस्सा है। सरकार को सेवा नियमों में बदलाव करने का अधिकार तब तक है, जब तक कि वह निर्णय मनमाना या दुर्भावनापूर्ण न हो।
यह मामला ओडिशा के परिवहन विभाग के कर्मचारियों से जुड़ा हुआ था। कर्मचारी असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर यानी एआरटीओ के पद पर प्रमोशन की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि चूंकि वैकेंसी पुराने नियमों के समय की हैं, इसलिए वे पुराने नियमों के तहत ही प्रमोशन के पात्र हैं।













