ब्लिट्ज ब्यूरो
आइजोल। मिजोरम में सक्रिय अंतिम जातीय उग्रवादी समूह ने विगत दिवस अपने हथियार डाल दिए। इसी के साथ पूर्वोत्तर का अहम राज्य मिजोरम अब उग्रवाद मुक्त हो गया है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने यह जानकारी दी। दरअसल मिजोरम में फरवरी 1966 से मानवीय हिंसा और उग्रवाद का दौर मिजो नेशनल फ्रंट के साथ शुरू हुआ था जो कि पूरे 60 साल बाद थमा है।
घर वापसी व हथियार सौंपने के लिए समारोह
अधिकारियों के मुताबिक हालांकि यह उग्रवादी समूह कई सालों से निष्िक्रय था, लेकिन हमार पीपुल्स कन्वेंशन (डेमोक्रेटिक) यानी एचपीसी (डी) के ललह्मिंगथांगा सनाटे के नेतृत्व वाले एक धड़े की ओर से समय-समय पर छिटपुट आपराधिक गतिविधियां की जाती थीं। अधिकारियों के अनुसार, सनाटे धड़ा ही राज्य में बचा हुआ अंतिम सक्रिय उग्रवादी समूह माना जा रहा था। सनाटे समेत उग्रवादी समूह के कुल 43 सदस्यों ने आइजोल के पास सेसावंग में आयोजित ‘घर वापसी और हथियार सौंपने के समारोह’ के दौरान सरकार को अपने हथियार सौंप दिए।
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने क्या कहा?
यह घर वापसी समारोह मिजोरम सरकार और एचपीसी(डी) के बीच हुए शांति समझौते के बाद आयोजित किया गया, इसे राज्य में उग्रवाद का औपचारिक रूप से अंत माना जा रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा कि पहले जब भी मिजोरम में शांति की बात होती थी, तो एचपीसी(डी) के उग्रवाद की छाया लोगों के मन में बनी रहती थी। उन्होंने कहा कि हमने खुले दिल से बातचीत की और समझौते तक पहुंचे। हमारे गृह मंत्री और उनकी टीम ने अथक प्रयास किए। आज हम अपने लक्ष्य तक पहुंच गए हैं। अब हम गर्व से कह सकते हैं कि मिजोरम वास्तव में एक शांतिपूर्ण राज्य है।
मुख्यमंत्री ने अलग-अलग मिजो जनजातियों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी उप-जनजाति की पहचान मिजो पहचान से ऊपर नहीं हो सकती। हम सभी मिजो हैं। यदि समुदाय के भीतर उप-जनजातियां अलग पहचान बनाने की कोशिश करेंगी, तो वे सफल नहीं हो पाएंगी। हमें अपनी साझा मिजो पहचान में संतोष करना होगा। हम केवल एकता के माध्यम से ही आगे बढ़ सकते हैं।
शांति को अधिक मूल्यवान बताया
शांति को अधिक मूल्यवान बताते हुए लालदुहोमा ने कहा कि उन्होंने दशकों पहले मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अलगाववादी आंदोलन के दौरान शांति बहाली के लिए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से इस्तीफा दिया था और कई व्यक्तिगत त्याग किए थे।












