ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। विश्व की दिग्गज कंपनी रोसाटॉम ने भारत को अपना रुसबीम 2800 इंडस्टि्रयल 3डी प्रिंटर दिया है, जो परस्पर तकनीकी सहयोग की दिशा में एक अहम कदम है। यह सिस्टम, जो इलेक्ट्रॉन बीम एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित है, एयरोस्पेस के पुर्ज़ों के उत्पादन के लिए लगाया और चालू किया गया है। उल्लेखनीय है कि रोसाटॉम रूस की एक सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी है। इसका पूरा नाम ‘स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉर्पोरेशन रोसाटॉम’ है और इसका मुख्यालय रूस की राजधानी मॉस्को में स्थित है।
यह कॉन्ट्रैक्ट एक प्रतिस्पर्धी अंतरराष्ट्रीय टेंडर के बाद हुआ, जो उच्च-विशिष्ट अनुप्रयोगों में रूसी एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम की स्वीकार्यता का संकेत देता है। रोसाटॉम ने बताया कि इस पेशकश में हार्डवेयर, सामग्री, सॉफ्टवेयर और सेवाएं शामिल हैं, जिन्हें ग्राहक की ज़रूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। आगे की सप्लाई, एडिटिव तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान, और भारत में मैन्युफैक्चरिंग के संभावित स्थानीयकरण पर चर्चा चल रही है। यह अचीवमेंट दिसंबर 2025 में व्लादिमीर पुतिन और नरेंद्र मोदी के बीच हुए शिखर सम्मेलन के दौरान तय की गई सहयोग प्राथमिकताओं के अनुरूप है, जिसमें परमाणु और गैर-परमाणु तकनीकों में सहयोग पर ज़ोर दिया गया था।
ईबीएएम सिस्टम का लक्ष्य बड़े, जटिल एयरोस्पेस ढांचे बनाना है। रुसबीम 2800 को भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉन बीम वायर डिपोज़िशन सिस्टम बताया गया है, जो वैक्यूम (निर्वात) वातावरण में काम करता है। यह 2.8 मीटर तक की ऊंचाई और चार टन तक वज़न वाले धातु के पुर्ज़ों के निर्माण को संभव बनाता है। यह सिस्टम टाइटेनियम, निकेल, कोबाल्ट क्रोम और रिफ्रैक्टरी मिश्र धातुओं को प्रोसेस कर सकता है, जिससे उन अनुप्रयोगों को मदद मिलती है जिनमें उच्च सामग्री अखंडता की आवश्यकता होती है।
इसकी डिपोज़िशन दर लगभग पांच घंटों में 50 किलोग्राम का पार्ट बनाने की अनुमति देती है, जिससे पारंपरिक प्रक्रियाओं की तुलना में काम तेज़ी से पूरा होता है। वैक्यूम-नियंत्रित वातावरण धातुकर्म संबंधी एकरूपता में सुधार करता है, जो एयरोस्पेस उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस तकनीक से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के नेतृत्व वाले कार्यक्रमों, जिनमें गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रयान कार्यक्रम शामिल हैं, को सहायता मिलने की उम्मीद है।
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से लगने वाला समय और सामग्री की बर्बादी कम होती है
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग ऐसी आकृतियों का उत्पादन संभव बनाती है जिन्हें कास्टिंग या मशीनिंग के ज़रिए बनाना मुश्किल होता है। यह प्रक्रिया केवल आवश्यक मात्रा में सामग्री जमा करके सामग्री के उपयोग को कम करती है और टूलींग की ज़रूरतों को समाप्त करती है। यह कई-पुर्ज़ों वाली असेंबलियों को एकल घटकों में एकीकृत करने की भी अनुमति देती है, जिससे संरचनात्मक दक्षता में सुधार होता है। लीड टाइम को महीनों से घटाकर कुछ दिनों तक किया जा सकता है, जबकि मटीरियल के इस्तेमाल की दर 90 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। जब उत्पाद का जीवनकाल समाप्त हो जाता है, तो उसे रीसायकल करने की क्षमता और कम कचरा, उसके पूरे जीवनचक्र की लागत को कम करने में योगदान देते हैं। ये विशेषताएं एयरोस्पेस, परमाणु और चिकित्सा जैसे उन क्षेत्रों के लिए तेज़ी से महत्वपूर्ण होती जा रही हैं, जो लचीले उत्पादन और विकास के तेज चक्रों की तलाश में हैं।












