ब्लिट्ज ब्यूरो
वाशिंगटन। अमेरिका में ग्रीन कार्ड को लेकर एक बड़ा अपडेट आया है, जो उन सभी भारतीय वर्कर्स और स्टूडेंट्स के लिए राहत भरी खबर है, जो यहां बसने का प्लान कर रहे हैं। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड (डीएचएस) यानी अमेरिकी गृह मंत्रालय ने कहा है कि ज्यादातर विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करते वक्त अमेरिका छोड़कर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग के दौरान भी यूएस छोड़कर जाने की जरूरत नहीं है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार का ये यू-टर्न ऐसे समय पर आया है, जब ग्रीन कार्ड से जुड़े नए नियम की वजह से भारतीयों की बेचैनी बढ़ गई थी। यूएससीआईएस ने पिछले हफ्ते जारी किए नियम में कहा था कि जिन विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड चाहिए, उन्हें पहले अपने देश लौटना होगा और वहां से ही आवेदन के बाद अप्रूवल का इंतजार करना होगा। इसका मतलब था कि ग्रीन कार्ड पाने के लिए देश छोड़ना जरूरी हो गया।
ग्रीन कार्ड कैसे मिलता है?
अमेरिका में स्थायी रूप से रहने के लिए ग्रीन कार्ड दिया जाता है। इसके लिए भारतीय वर्कर्स तो अप्लाई कर ही सकते हैं, लेकिन जो स्टूडेंट्स यहां पढ़ने जाते हैं, वो भी पढ़ाई खत्म कर नौकरी करने के बाद ग्रीन कार्ड के लिए योग्य हो जाते हैं। भारतीय स्टूडेंट-वर्कर्स को ग्रीन कार्ड निम्नलिखित चरणों में मिलता है:
जॉब स्पांसरशिप: सबसे पहले अमेरिकी कंपनी से जॉब लेनी होती है और उसका स्पांसरशिप मिलना भी जरूरी होता है।
लेबर सर्टिफिकेशन: स्पांसरशिप के दौरान कंपनी को साबित करना पड़ता है कि जॉब के लिए योग्य अमेरिकी नागरिक नहीं है।
वीजा पिटीशन: कंपनी वर्कर्स के लिए यूएससीआईएस में I-140 पिटीशन फाइल करती है। इसे ग्रीन कार्ड के लिए याचिका दायर करना कहा जाता है।
प्रायोरिटी डेट: वर्कर को अपनी कैटेगरी के अनुसार ‘प्रायोरिटी डेट’ का नंबर आने का इंतजार करना होता है।
एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस: I-485 फॉर्म भरकर अमेरिका में रहते हुए ही ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करना पड़ता है।
बैकग्राउंड चेक: मेडिकल रिपोर्ट और सुरक्षा जांच प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जिसके बाद ग्रीन कार्ड मिल जाता है।
ग्रीन कार्ड पर सफाई
डीएचएस ने कहा कि कोई बड़ा नीतिगत बदलाव नहीं हो रहा है। इसकी जगह अब इमिग्रेशन अधिकारी हर केस के आधार पर तय करेंगे कि क्या आवेदक को ग्रीन कार्ड प्रोसेस अपने देश से पूरा करना चाहिए या नहीं? अधिकारियों के पास पहले से ही इसका अधिकार रहा है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘यह (नया नियम) अधिकारियों को उनके विवेकाधीन अधिकार की याद दिलाने के लिए मात्र था, जो हमेशा से ही हर केस के आधार पर मौजूद रहा है।’ जो लोग वीजा की अवधि से अधिक समय तक रुकते हैं या ऐसे देशों से आते हैं जिनके नागरिक सरकारी लाभ का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं, उन पर नए नियम का सर्वाधिक असर होगा।













