ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल यात्रा और पहचान संबंधी दस्तावेज है, न कि भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण। पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर मंत्रालय ने यह भी कहा कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन नागरिकता के निर्धारण संबंधित कानूनों और अन्य वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है।
नागरिकता पर मंत्रालय की सफाई
मंत्रालय की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विभिन्न मंचों पर पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में लेकर भ्रम की स्थिति देखी जाती रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है।
1.5 करोड़ लोगों को मिली सेवाएं
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों और विदेशों में भारतीय मिशनों ने मिलकर करीब 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान कीं। सरकार लगातार पासपोर्ट सेवाओं को अधिक सरल, तेज और सुलभ बनाने पर काम कर रही है।
545 केंद्रों तक पहुंचा नेटवर्क
देशभर में पासपोर्ट सेवा केंद्र और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र की संख्या बढ़कर 545 हो गई है। पिछले वर्ष 10 नए डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले गए थे और इस वर्ष भी 10 नए केंद्र शुरू किए जाने की योजना है।
कई मामलों में पांच दिन में पासपोर्ट
अधिकारियों ने बताया कि पासपोर्ट सेवा प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। कई मामलों में पासपोर्ट जारी होने का समय घटकर पांच कार्यदिवस तक पहुंच गया है। वहीं, पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर आवेदकों को 45 मिनट से कम समय में प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा मिल रही है।
भारतीय पासपोर्ट की बढ़ी पहुंच
मंत्रालय के अनुसार भारतीय नागरिकों को फिलहाल 27 देशों में वीजा-फ्री प्रवेश, 47 देशों में वीजा ऑन अराइवल और 66 देशों में ई-वीजा की सुविधा उपलब्ध है।
केवल 10 प्रतिशत भारतीयों के पास पासपोर्ट
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि देश की कुल आबादी की तुलना में अभी लगभग 10 प्रतिशत भारतीयों के पास ही पासपोर्ट हैं।
मंत्रालय के मुताबिक अब तक 1.47 करोड़ चिप-युक्त ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक चिप और उन्नत बायोमेट्रिक सुरक्षा तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे दस्तावेजों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ी है।













