ब्लिट्ज ब्यूरो
भोपाल। राजधानी की शान बड़े तालाब को बचाने के लिए गठित टास्क फोर्स ने अतिक्रमण हटाने के लिए एक नया फॉर्मूला निकाला है। पहली बैठक में यह तय किया गया कि 16 मार्च 2022 से पहले बने निर्माणों को तभी ढहाया जाएगा जब वे बिना अनुमति के बने हों। लेकिन, इस तारीख के बाद जो भी ईं ंट रखी गई है, उसे जमींदोज किया जाएगा। चाहे उसके पास सरकारी परमिशन ही क्यों न हो।
क्यों चुनी गई 16 मार्च 2022 की तारीख?
टास्क फोर्स के अध्यक्ष और अपर कलेक्टर अंकुर मेश्राम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने भोज वेटलैंड एक्ट लागू किया, जो 16 मार्च 2022 से प्रभावी हुआ। प्रशासन का तर्क है कि इस कानून के आने के बाद ही ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ की कानूनी सीमाएं पूरी तरह स्पष्ट हुईं। इसलिए, इस तारीख से पहले के वैध निर्माणों को अलग कैटेगरी में रखकर उनकी जांच की जाएगी।
रसूखदारों को बचाने की कोशिश?
प्रशासन के इस तर्क पर कानूनी विशेषज्ञों ने मोर्चा खोल दिया है। पर्यावरण कार्यकर्ता राशिद नूर खान के वकील हर्षवर्धन तिवारी का कहना है कि प्रशासन नियमों की गलत व्याख्या कर रहा है। उनका तर्क है कि 2022 से पहले भी 2010 और 2017 के वेटलैंड रूल्स लागू थे। इन नियमों में साफ लिखा था कि तालाब के 50 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं हो सकता।
मैरिज गार्डन और रसूखदारों पर नजर
विशेषज्ञों का आरोप है कि 2022 की डेडलाइन सिर्फ बैरागढ़ के मैरिज गार्डनों, श्यामला हिल्स और वीआईपी रोड के रसूखदारों को बचाने के लिए लाई गई है। अगर 2010 के नियमों को आधार बनाया जाए, तो तालाब किनारे खड़े दर्जनों बड़े होटल और गार्डन अवैध घोषित हो जाएंगे।













