ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र सरकार पुलिस संचार प्रणाली को आधुनिक स्वरूप देने में जुटी है। इसका उद्देश्य देश में कानून-व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, तेज और तकनीक-आधारित बनाना है।
सरकार की यह पहल ‘एक राष्ट्र-एक पुलिस संचार नेटवर्क’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी, बल्कि आपदा प्रबंधन की क्षमता भी नए आयाम हासिल करेगी।
इस क्रम में पुलिस वायरलेस समन्वय निदेशालय (डीसीपीडब्ल्यू) द्वारा संचालित उपग्रह आधारित राष्ट्रीय संचार नेटवर्क ‘पोलनेट’ को उन्नत (अपग्रेड) किया जा रहा है, जिससे देशभर की सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल और सूचना आदान-प्रदान की क्षमता और मजबूत होगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ‘पोलनेट’ विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच संचार का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। अब इसके अपग्रेडेशन के बाद वीडियो, वॉयस और डेटा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद हो रही हैं। इससे राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के बीच वास्तविक समय (रियल-टाइम) में सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव होगा, जिससे ऑपरेशन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
सरकार इस नेटवर्क के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि देश के दूरदराज, सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में भी निर्बाध और सुरक्षित संचार व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके। इससे आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना आसान होगा।
आपात स्थितियों में भी संचार
इसी दिशा में केंद्र सरकार ने ‘पैन इंडिया सार्वजनिक सुरक्षा एवं आपदा राहत (पीपीडीआर) सेल्युलर मोबाइल नेटवर्क’ की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा है। या एक अत्याधुनिक और मिशन-क्रिटिकल संचार नेटवर्क होगा, जिसे विशेष रूप स पुलिस, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन बलों और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। इस नेटवर्क में सुरक्षित (एन्क्रिप्टेड) और प्राथमिकता आधारित संचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे आपातकालीन स्थितियों में भी संचार बाधित नहीं होगा। इससे देश भर की एजेंसियों को जोड़ा जाएगा।
पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम में सुधार
अधिकारी ने कहा, जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव की बात करें तो ऐसी पहल के लागू होने से पुलिस की प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) में उल्लेखनीय कमी आएगी। कुछ सेकेंड में ही घटनास्थल तक सूचना पहुंचेगी, जिससे अपराधों पर त्वरित नियंत्रण संभव होगा। सड़क दुर्घटनाओं, आगजनी, बाढ़, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य अधिक समन्वित और प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे।
एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल होगा
इस कवायद से विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से भ्रम, देरी और सूचना की कमी जैसी समस्याएं भी कम होंगी, जिसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। पीपीडीआर नेटवर्क लागू होने के बाद देश में एक एकीकृत, सुरक्षित और अत्याधुनिक संचार प्रणाली विकसित होगी, जो भविष्य की चुनौतियों जैसे साइबर अपराध, आतंकी गतिविधियां और बड़े पैमाने पर आपदाओं से निपटने में कारगर साबित होगी।













