दीपक द्विवेदी
देश को ऊर्जा स्रोतों में आत्मनिर्भरता के लिए नए सिरे से नीतियां बना कर त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा क्योंकि आपदा को सुअवसर में बदलना भारत को आता है।
अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष से वैश्विक तेल आपूर्ति में गंभीर रूप से कमी (प्रति दिन करीब 11 मिलियन बैरल की कमी) आने के कारण भारत में भी तेल एवं गैस का संकट बढ़ा है। इस कमी को पूरा करने के लिए भारत ने भी आपूर्ति में वृद्धि की है लेकिन पुरातात्विक, विविध तेल भंडार (रूस/अमेरिका) और अन्य प्रमुख भंडारों के कारण देश में दिक्क त के बाद भी अपेक्षाकृत आपूर्ति स्थिर है। इसके अतिरिक्त आपूर्ति में वृद्धि के लिए सरकार ने अब 41 देशों से तेल और गैस मंगाना प्रारंभ कर दिया है जबकि पहले सिर्फ 21 देशों से ही आयात हो रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से ईद के मौके पर तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन आने पर बातचीत के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा के दौरान ईरान-इजरायल और ईरान-यूएस के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के मुद्दे पर अपने विचार साझा किए। इसका एक ही मकसद था कि मध्य एशिया में शीघ्र शांति स्थापित हो, तेल तथा गैस आपूर्ति का संकट समाप्त होने के साथ आमजन की परेशानियों का अंत भी हो। पीएम मोदी ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के निर्बाध आवागमन की सुरक्षा पर भी जोर दिया क्योंकि यह मार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल-गैस की आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मसूद को ‘नवरोज़’ (फारसी नया साल) और ईद की बधाई भी दी। एनडीए और विपक्षी नेताओं ने भी इस कूटनीतिक पहल का स्वागत किया। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल को रोकने और भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए यह संवाद जरूरी था।
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ईरान के राष्ट्रपति ने भी भारत के साथ संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई और युद्ध विराम की दिशा में सहयोग का आश्वासन दिया। यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ‘शांति दूत’ की भूमिका को और मजबूत करती है। यही नहीं, इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने ईरान और इजरायल, अमेरिका की जंग में भी बातचीत तथा कूटनीति का रास्ता अख्तियार करने पर जोर दिया। भारत के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती देश में तेल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने की है ताकि महंगाई नियंत्रण में रहे। पीएम मोदी ने लोकसभा एवं राज्यसभा में भी अपने संबोधन में माना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है और भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। राज्यसभा में अपने बयान में उन्होंने इस स्थिति से निपटने में राज्य सरकारों से सहयोग करने की अपील की और कहा कि यह टीम इंडिया की बहुत बड़ी परीक्षा है। पीएम ने कहा कि यह संकट अलग प्रकार का है और इसके समाधान भी अलग प्रकार से ही तय किए जा रहे हैं। इसके लिए अधिकार संपन्न 7 नए समूह बनाए गए हैं जो सप्लाई चेन, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइजर, गैस और महंगाई जैसे विषयों पर त्वरित और दूरगामी रणनीति के तहत कदम उठाएंगे।
पीएम ने कहा कि इस परीक्षा में सफलता के लिए राज्यों का सहयोग बहुत आवश्यक है। उन्होंने राज्य सरकारों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ समय पर मिलता रहे। जहां प्रवासी श्रमिक साथी काम करते हैं, उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाए जाएं। राज्य सरकारों से जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर भी तुरंत एक्शन लेने को उन्होंने कहा। पीएम ने कहा, ‘संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। हमें इसके लिए हर जरूरी रिफॉर्म्स तेजी से करते रहने होंगे। कोरोना के महासंकट में केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया बनकर कोविड मैनेजमेंट का एक बेहतरीन मॉडल सामने रखा था। पीएम ने विश्वास जताया कि सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयासों से देश इस गंभीर वैश्विक संकट का प्रभावी रूप से सामना कर पाएगा।
हां, ऊर्जा स्रोतों के इस महासंकट ने अब इस बात के महत्व को भी उजागर कर दिया है कि भारत को बहुत तेजी से अपने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश करनी होगी ताकि हम आत्मनिर्भर हो सकें तथा ऐसी परिस्थितियों का सामना फिर न करना पड़े। इस युद्ध में पल-पल में हालात बदल रहे हैं, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। वैसे बेहतर विपणन और आपूर्ति के विभिन्न विकल्पों के कारण भारत इस संकट को झेलने में सक्षम दिख रहा है। फिर भी देश को ऊर्जा स्रोतों में आत्मनिर्भरता के लिए नए सिरे से नीतियां बना कर त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा क्योंकि आपदा को सुअवसर में बदलना भारत को आता है।













