ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि संविधान कुछ खास और संपन्न लोगों का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह देश के हर नागरिक का समान अधिकार है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल उन लोगों के लिए नहीं है जो महंगी कानूनी प्रक्रिया का खर्च उठा सकते हैं और बड़े वकीलों की सेवाएं ले सकते हैं। चीफ जस्टिस ने यह बात वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की आत्मकथा ‘द कॉन्सि्टट्यूशन इज माई होम: कन्वर्सेशंस ऑन अ लाइफ इन लॉ’ के विमोचन कार्यक्रम के लिए भेजे गए वीडियो संदेश में कही।
उन्होंने कहा कि संविधान सच मायनों में सबका साझा घर है। यह केवल जजों, वकीलों या सरकारी संस्थाओं का नहीं, बल्कि हर नागरिक का है, चाहे वह शहर में रहने वाला हो, गांव का निवासी हो, गरीब हो या समाज के हाशिये पर खड़ा व्यक्ति। चीफ जस्टिस ने कहा कि लोग न्याय पाने और संविधान के वादों पर भरोसा करने के लिए इसकी ओर देखते हैं। संविधान सिर्फ दूर बैठकर समाज को नियंत्रित करने वाला कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन और लोकतंत्र के चरित्र में मौजूद रहता है।













