ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी यानी विंडफाल टैक्स बढ़ा दिया है। डीजल पर निर्यात शुल्क ₹34 प्रति लीटर बढ़ाकर ₹55.5 कर दिया गया है, जो पहले ₹21.5 था।
वहीं, एटीऐफ यानी जेट फ्यूल पर ड्यूटी ₹29.5 से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दी गई है। वित्त मंत्रालय ने विगत दिवस नोटिफिकेशन जारी कर नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी हैं।
वहीं, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी फिलहाल शून्य ही रहेगी। हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में जो ₹10-₹10 की बड़ी कटौती की थी, उसका फायदा आम जनता को मिलता रहेगा।
घरेलू बाजार में फ्यूल की सप्लाई बढ़ाने का फैसला
सरकार ने ये फैसला देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए लिया है। यह कदम उन आशंकाओं को दूर करता है जिनमें कहा जा रहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कच्चा तेल महंगा होने से भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।
इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में फ्यूल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए विदेशों में फ्यूल बेचना शुरू कर देती हैं। एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से निर्यात महंगा हो जाता है, जिससे कंपनियां घरेलू बाजार में सप्लाई देने को प्राथमिकता देती हैं।
मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर
पिछले कुछ महीनों से मिडिल ईस्ट में चल रही सैन्य गतिविधियों के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट अस्थिर बना हुआ है।
इससे पहले सरकार ने 26 मार्च को निर्यात शुल्क में संशोधन किया था। उस समय डीजल पर ड्यूटी ₹21.50 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹29.5 प्रति लीटर तय की गई थी। अब महज 15 दिनों के भीतर इसमें दोबारा बड़ी बढ़ोतरी की गई है। सरकार की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर है और उसी के आधार पर टैक्स दरों की समीक्षा की जा रही है।
विंडफाल टैक्स क्या होता है?
विंडफाल टैक्स उन कंपनियों पर लगाया जाता है जिन्हें किसी विशेष स्थिति (जैसे युद्ध या ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्क त) के कारण अचानक बहुत ज्यादा मुनाफा होने लगता है। भारत में तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों का फायदा उठाने से रोकने और सरकारी खजाना भरने के लिए इसे ‘एक्सपोर्ट ड्यूटी’ के तौर पर लगाया जाता है।













