ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए आम्रपाली ग्रुप की 99.26 करोड़ रुपए की अचल सम्पत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया। इनमें समूह की फरीदाबाद में फैक्ट्री, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के ऑफिस शामिल हैं। ईडी अब तक आम्रपाली समूह की 303 करोड़ रुपए की सम्पत्तियां जब्त कर चुकी है। इसके अलावा इस ग्रुप की कई और सम्पत्तियां चिह्नित की जा रही हैं। जल्दी ही ईडी इन पर भी कार्रवाई करेगी। आम्रपाली समूह के खिलाफ सबसे ज्यादा मुकदमे नोएडा में दर्ज हुए थे।
नवीनतम कार्रवाई को ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने पीएमएलए (धनशोधन निवारण अधिनियम) के अंतर्गत अंजाम दिया। इस बारे में एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि जब्त की गई अचल संपत्तियों में मौर्या उद्योग लिमिटेड का ऑफिस, फैक्ट्री की जमीन और इमारत शामिल है। मौर्या उद्योग लिमिटेड सुरेका ग्रुप की कंपनियों में से एक है, जिसके प्रमोटर (मालिक) नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका हैं।
आम्रपाली समूह ने निवेशकों से मोटी रकम लेकर फ्लैट देने का वादा किया था। पर, तय समय पर निवेशकों को न तो फ्लैट दिए गए और न ही उनकी रकम लौटाई गई। इन फ्लैट के नाम पर जमा अरबों रुपए की रकम को आम्रपाल समूह के निदेशकों ने अपनी दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर लिया था। निवेशकों ने इस मामले में आम्रपाली समूह के निदेशकों अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया, अजय कुमार के नवनीत सुरेका, अखिल सुरेका, मौर्या उद्योग लिमिटेड, जोतिंद्र स्टील एंड टयूब्स लिमिटेड के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करने की एफआईआर दर्ज कराई थी।
िनर्माण सामग्री खरीदने के नाम पर फंड डायवर्ट
ईडी की जांच में पता चला कि आरोपी व्यक्तियों, उनके सहयोगियों और प्रमोटरों यानी अम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार ने इस धोखाधड़ी को मेसर्स मौर्या उद्योग लिमिटेड और मेसर्स जोतिंद्र स्टील एंड ट्यूब्स लिमिटेड के डायरेक्टरों नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका के साथ मिलकर अंजाम दिया। इन आरोपियों ने टीएमटी बार और निर्माण सामग्री की खरीद के बहाने गैर-वास्तविक और धोखाधड़ी वाले लेनदेन के माध्यम से घर खरीदारों के फंड को डायवर्ट किया। आरोपियों द्वारा लोगों से प्राप्त रकम को शेल (फर्जी) कंपनियों और नकली सप्लायरों के एक जटिल जाल के माध्यम से लेयर किया गया और बड़ी मात्रा में धनराशि को खर्च कर दिया गया, जिससे अपराध की आय उत्पन्न हुई और मनी लॉन्डि्रंग की गई।
मौर्या उद्योग को भेजे गए थे 110.39 करोड़ रुपए
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि आम्रपाली के प्रोजेक्ट में घर खरीदने वालों से जमा 110.39 करोड़ रुपए की राशि आरोपियों ने मौर्या उद्योग लिमिटेड को डायवर्ट की थी। इससे पहले, ईडी ने आम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर अनिल शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार, आम्रपाली ग्रुप के ऑडिटर अनिल मित्तल और आम्रपाली ग्रुप के सीएफओ चंदर प्रकाश वधवा को गिरफ्तार किया था। ईडी ने अब तक इस मामले में छह प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की हैं, जिसमें 33 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। साथ ही पीएमएलए, 2002 की धारा 5 (1) के तहत एजेंसी अबतक कुल लगभग 303.08 करोड़ रुपए के मूल्य वाली संपत्तियों को अटैच कर चुकी है।































