शुभांगी सिंह
एक दशक पहले 2016 में मोदी सरकार ने स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत की थी। उस मुहिम ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को तेजी से आगे बढ़ने में काफी मदद की। तब से लेकर अब तक 10 सालों में स्टार्टटअप की दुनिया में काफी कुछ बदल चुका है। स्टार्टअप्स की संख्या आज इतनी ज्यादा हो गई है कि आंकड़े आपको हैरान कर सकते हैं। आज के वक्त में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तीसरे नंबर पर है।
वहीं दूसरी ओर, पिछले 10 सालों में स्टार्टअप्स की वजह से बहुत सी नौकरियां भी पैदा हुईं। जानिए इन 10 सालों में कितने स्टार्टअप शुरू हुए, कितने बंद हुए, कितने यूनिकॉर्न बन गए और सरकार ने इन स्टार्टअप्स को प्रमोट करने के लिए क्या-क्या किया।
भारत के स्टार्टअप्स ने 9 सालों में (31 अक्टूबर 2024 तक ) 16.67 लाख नौकरियां पैदा की थीं। यानी अभी इस आंकड़े के 20 लाख के करीब पहुंचने की संभावना है। सबसे ज्यादा नौकरियां आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में पैदा हुई हैं।
420 गुना बढ़ी स्टार्टअप संख्या
डीपीआईआईटी के आंकड़ों के अनुसार 2016 में भारत में स्टार्टअप्स की संख्या करीब 500 थी, जिस वक्त स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत हुई थी।
वहीं अगर 10 साल बाद स्टार्टअप्स की संख्या की बात करें तो अब ये आंकड़ा 2,09,487 (15 जनवरी, दोपहर 2.40 बजे तक) पर पहुंच चुका है। यानी पिछले 10 सालों में स्टार्टअप्स की संख्या में करीब 420 गुना का इजाफा हुआ है।
कितनी नौकरियां हुईं पैदा?
पिछले 10 सालों में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम ने बहुत सारी नौकरियां पैदा की हैं। भारत के स्टार्टअप्स ने 9 सालों में (31 अक्टूबर 2024 तक) 16.67 लाख नौकरियां पैदा की थीं। यानी अभी इस आंकड़े के 20 लाख के करीब पहुंचने की संभावना है। सबसे ज्यादा नौकरियां आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में पैदा हुई हैं।
महिलाओं को कितना मिला प्रोत्साहन?
स्टार्टअप इंडिया का मकसद सिर्फ इतना नहीं था कि नए-नए स्टार्टअप खुलें, बल्कि महिलाओं को भी इसके तहत प्रोत्साहित किया जाता रहा है। अगर पिछले 1 दशक की बात करें तो करीब 75 हजार स्टार्टअप ऐसे हैं, जिनमें कम से कम एक महिला डायरेक्टर जरूर है।
स्टार्टअप्स के लिए आईं क्या स्कीमें?
पिछले 10 सालों में भारत सरकार की तरफ से बहुत सारी स्कीमें शुरू की गई हैं। इनका मकसद यही था कि स्टार्टअप्स को प्रमोट किया जा सके।
स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान (2016)
यह 19 प्वाइंट का एक्शन प्लान था, जिसे रेगुलेशन्स को आसान करने, टैक्स से जुड़े फायदे देने और बिजनेस शुरू और बंद करने की प्रोसेस आसान करने के मकसद से लाया गया था।
फंड आफ फंड्स बार स्टार्टअप्स(एफएफएस)
इसके तहत सरकार ने ₹10,000 करोड़ का कॉर्पस (सिडबी की तरफ से मैनेज) बनाया, ताकि एआईएफ्स के जरिए स्टार्टअप्स को इक्विटी मदद मिले। बता दें कि इस फंड को सीधे स्टार्टअप्स को नहीं दिया जाता है, बल्कि इनक्युबेटर्स या सेबी रजिस्टर्ड एआईएफ्स को दिया जाता है, जो स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं।
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (एसआईएसएफ)
सरकार ने इसे 2021 में लॉन्च किया था, जिसके तहत करीब ₹945 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाया गया। इसके जरिए स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट और प्रोटोटाइप बनाने के लिए फंडिंग की जाती है।
टैक्स बेनिफिट्स
स्टार्टअप इंडिया के तहत रजिस्टर होने वाले स्टार्टअप्स को 3 साल के लिए टैक्स छूट मिलती है, ताकि वह अपने बिजनेस को बेहतर बना सकें। यह फायदा किसी स्टार्टअप के शुरू होने की तारीख से 10 सालों तक लगातार किसी भी 3 साल के लिए मिल सकता है।
कंप्लायंस ईजिंग
वहीं लेबर लॉ और पर्यावरण लॉ के तहत सेल्फ सर्टिफिकेशन की सुविधा भी सरकार ने शुरू की. इसके तहत 6 लेबर लॉ और 3 पर्यावरण लॉ को रखा गया है। सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए पेटेंट हासिल करने की प्रोसेस को भी आसान किया है, ताकि इनोवेशन को बढ़ावा मिल सके।
स्टार्टअप महाकुंभ
हर साल राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम ने स्टार्टअप महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में हजारों स्टार्टअप, निवेशक और स्टार्टअप ईकोसिस्टम से जुड़े तमाम लोग पहुंचते हैं। इससे उन सभी लोगों को एक मंच मिलता है, जिस पर वह अपने स्टार्टअप को प्रमोट कर सकते हैं।












