ब्लिट्ज ब्यूरो
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में रंगपंचमी पर निकलने वाली ऐतिहासिक ‘गैर’ को लेकर इस बार प्रशासन और नगर निगम ने व्यापक तैयारियां की हैं। परंपरागत रूप से निकलने वाली यह ‘गैर’ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान रखती है। हर साल हजारों की संख्या में लोग इस आयोजन को देखने के लिए इंदौर पहुंचते है जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं।
नगर निगम और जिला प्रशासन लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं कि इंदौर की इस ऐतिहासिक ‘गैर’ को ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान’ मिले और इसे ‘यूनेस्को की धरोहर सूची’ में शामिल किया जा सके। इसी कड़ी में एक बार फिर यूनेस्को के लिए आवेदन किया गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि इस बार ‘यूनेस्को की टीम’ भी रंगपंचमी की ‘गैर’ का अध्ययन करने के लिए इंदौर पहुंचेगी। टीम आयोजन की परंपरा, व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक महत्व का सर्वे करेगी और इसके आधार पर इसे धरोहर के रूप में शामिल करने की संभावनाओं का आकलन करेगी। यदि आयोजन के दौरान कोई छोटी-मोटी घटना या अव्यवस्था नहीं होती है, तो इस बार इंदौर की ‘गैर’ के यूनेस्को में शामिल होने की उम्मीद है।
2020 में तत्कालीन कलेक्टर ने तैयार किया था प्रस्ताव
‘गैर’ को सांस्कृतिक विरासत श्रेणी की सूची में शामिल कराने के लिए साल 2020 में तत्कालीन कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव ने प्रस्ताव तैयार करवाया था, ‘गैर’ के जुलूस की वृत्तचित्र फिल्म बनाकर इसे अमूर्त सांस्कृतिक विरासत श्रेणी सूची में नामांकित करने के लिए यूनेस्को को भेजने की योजना बनाई गई थी लेकिन कोरोना ने तैयारियों पर पानी फेर दिया और 2020 में ‘गैर’ नहीं निकाली जा सकी थी लेकिन इस बार इसे यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज में शामिल कराने की पुरजोर कोशिश की जा रही है।













