ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा है कि जो जज अपनी आय के हिसाब से जीवन यापन नहीं कर सकते और लालच और प्रलोभन के शिकार हो जाते हैं। ऐसे जजों को न्यायिक प्रणाली से हटा देना चाहिए।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायिक अखंडता को बनाए रखने के महत्व पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “जो न्यायाधीश अपनी ज्ञात आय के दायरे में रहकर जीवन यापन करने में असमर्थ हैं और लालच और प्रलोभन के शिकार हो जाते हैं। उन्हें व्यवस्था से बाहर निकाल देना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि न्यायाधीशों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय साहस और स्वतंत्रता विकसित करनी चाहिए और न्यायाधीशों को आगाह किया कि वे मामलों पर निर्णय लेते समय बाहरी कारकों से प्रभावित न हों। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि निर्णय लेने में किसी प्रकार का ‘समन्वय’ नहीं हो सकता। किसी न्यायाधीश द्वारा लिया गया दागी निर्णय न्यायाधीश और स्वयं न्यायपालिका पर एक कलंक है।
नागरत्ना ने न्यायपालिका में महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक संस्थागत उपायों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिला न्यायाधीशों के लिए सुरक्षा, गरिमा और अनुकूल कार्य परिस्थितियां होनी चाहिए। इस दौरान नागरत्ना न केवल भौतिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया, बल्कि पूर्वाग्रह और उत्पीड़न से सुरक्षा की भी आवश्यकता पर बल दिया।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने अपने भाषण का समापन इस बात की पुष्टि करते हुए किया कि एआई को हमेशा एक हाशिये पर स्थित उपकरण के रूप में ही रहना चाहिए।













