ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह फैसला दिया है कि किसी वाद के मूल्यांकन में कमी या कोर्ट फीस के भुगतान में कमी के आधार पर किसी वाद को सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के तहत अपने आप ही खारिज नहीं किया जा सकता। चूंकि ये दोनों कमियां सुधारी जा सकने वाली हैं, इसलिए वादी को सुधार का मौका दिया जाना चाहिए। साथ ही वाद को तभी खारिज किया जाना चाहिए, जब वह इस मौके का पालन न करे।
कोर्ट ने कहा, आदेश VII नियम 11(बी) या (सी) के तहत किसी का वाद-पत्र, केवल कम मूल्यांकन या कोर्ट फीस में कमी पाए जाने पर अपने आप खारिज नहीं हो जाता; बल्कि, यह कोर्ट द्वारा दिए गए सुधार के मौके का पालन न करने पर निर्भर करता है। कोर्ट की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा, संहिता के आदेश VII नियम 11 के खंड (बी) और (सी) को सीधे और एक साथ पढ़ने से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि उसमें बताए गए आधारों पर किसी वाद-पत्र को खारिज करने की शक्ति का प्रयोग, पहली बार में वादी को सुधार का मौका दिए बिना नहीं किया जाना चाहिए।













