दीपक द्विवेदी
राज्यों की चुनावी राजनीति ने साबित कर दिया है कि भगवा रंग अब भारत के चुनावी नक्शे का सबसे प्रमुख रंग बन गया है। ताजा विधानसभा चुनाव परिणामों ने एक बार फिर उस रुझान को मजबूत किया है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से साफ दिखाई दे रहा है। यह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का लगातार फैलता चौतरफा जबरदस्त राजनीतिक वर्चस्व।
हम सभी जान चुके हैं कि पश्चिम बंगाल और असम में पार्टी की बड़ी जीत और दक्षिण भारत के राज्यों में उसके बढ़ते वोट शेयर ने यह साफ कर दिया है कि भगवा लहर रुकने वाली नहीं है। हालात साफ बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति और रणनीति आने वाले कई वर्षों तक भारतीय राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाये रखेगी। प्रधानमंत्री मोदी की मजबूत कमांड, उनकी अद्भुत संगठनात्मक क्षमता और व्यापक वैचारिक पहुंच के बल पर भाजपा आज केवल हिंदी पट्टी की पार्टी नहीं रही, बल्कि एक अखिल भारतीय राजनीतिक ताकत बन चुकी है।
आज भाजपा और उसके सहयोगी 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सत्ता में हैं, जो देश की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी को कवर करते हैं। पार्टी की सबसे ताजा और महत्वपूर्ण उपलब्धि पूर्वी भारत का राज्य पश्चिम बंगाल है, जिसे लंबे समय तक भाजपा के लिए सबसे कठिन वैचारिक और चुनावी चुनौती माना जाता था।
इन चुनाव परिणामों ने इस धारणा को और मजबूत किया है कि प्रधानमंत्री मोदी आज भी देश के सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय राजनीतिक नेता हैं और भाजपा अगले लोकसभा चुनावी मुकाबले के लिए बहुत मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी है। मुद्दे का विषय यह है कि सत्ता में एक दशक से अधिक समय बिताने के बाद भी भाजपा की रफ्तार कम नहीं हुई है। इसके बजाय, यह भी जगजाहिर है कि भाजपा एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था खड़ी करती दिख रही है, जो 2029 के बाद भी लंबे समय तक सत्ता में कायम रह सकने में कामयाब रहेगी।
इन नतीजों से यह भी स्पष्ट होता है कि देश की राजनीति अब क्षेत्रीय नेताओं, जातीय समीकरणों या स्थानीय पहचानों की बजाय प्रधानमंत्री मोदी के इर्द-गिर्द अधिक घूम रही है। हरियाणा, असम, ओडिशा और अब पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भाजपा ने मोदी के नेतृत्व, कल्याणकारी योजनाओं, राष्ट्रवाद और हिंदू पहचान की राजनीति को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ा है।

भाजपा की सफलता की सच्चाई का एक बड़ा आधार उसकी कल्याणकारी राजनीति रही है। केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, आवास योजनाएं, स्वास्थ्य बीमा और बड़े पैमाने पर चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने मतदाताओं और प्रधानमंत्री के बीच सीधा भावनात्मक और राजनीतिक रिश्ता बनाया है।
भाजपा की लगातार चुनावी सफलता के पीछे एक और बहुत महत्वपूर्ण कारण प्रधानमंत्री मोदी द्वारा महिलाओं के एक मजबूत वोटर वर्ग को तैयार करना रहा है। पिछले एक दशक में पार्टी ने कल्याणकारी शासन और हाल ही में महिला आरक्षण कानून के माध्यम से शहरी और ग्रामीण भारत की महिलाओं से सीधा राजनीतिक और भावनात्मक जुड़ाव बनाया है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश लगातार यह रहा है कि महिलाएं केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदार हैं। इसी सोच ने महिलाओं का एक शांत लेकिन बहुत प्रभावशाली वोट बैंक तैयार किया है, जो अब पारंपरिक जाति और समुदाय के समीकरणों से अलग होकर भी मतदान कर रहा है। इसी दौरान भाजपा ने उन कई क्षेत्रीय दलों को भी धीरे-धीरे कमजोर किया है, जो कभी उसके विस्तार के रास्ते में बड़ी बाधा माने जाते थे। इनमें शिवसेना, एनसीपी, बीजेडी और अकाली दल जैसे दल शामिल हैं। वहीं, कांग्रेस और वाम दल देश के कई हिस्सों में लगातार सिमटते जा रहे हैं। भाजपा के लगातार दबाव के सामने विपक्ष बिखरा हुआ है और कोई मजबूत राष्ट्रीय विकल्प देने में असमर्थ दिखाई दे रहा है।
ताजा राजनीतिक बदलावों का बड़ा संदेश साफ है: अब बात सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। यह एक नए राजनीतिक युग के उभरने की कहानी है, जिस पर भाजपा की मजबूत संगठनात्मक मशीनरी और प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता तथा करिश्माई नेतृत्व की गहरी छाप है। लोग आज इसे खुलकर राजनीति का मोदी युग कह रहे हैं।













