डा. सीमा द्विवेदी
रबी फसलों की कटाई का समय चल रहा है और देश के कई हिस्सों में किसान सरसों और गेहूं की फसल काट चुके हैं, जबकि कई जगहों पर अभी कटाई जारी है। आमतौर पर इस समय किसान अपने खेतों को कुछ समय के लिए खाली छोड़ देते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह समय खाली छोड़ने के बजाय अतिरिक्त आय कमाने का बेहतरीन मौका होता है। कृषि विशेषज्ञ वकील यादव बताते हैं कि गेहूं और सरसों की कटाई के बाद अगर किसान दलहन और अन्य फसलों की खेती करें, तो कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
दलहन की फसलें
मक्क ा की खेती भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। मक्का को चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है और भुट्टे बेचकर भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। सही देखभाल और समय पर सिंचाई करने से किसान मक्क ा से 70 से 80 हजार रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं।
अगर किसान उन्नत किस्म के बीज और वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हैं, तो मूंग की पैदावार 5 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है। बाजार में मूंग का भाव आमतौर पर 6,000 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक रहता है। ऐसे में किसान एक एकड़ से 30,000 से 50,000 रुपये या उससे अधिक की कमाई आसानी से कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें उर्वरक और कीटनाशक पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता, जिससे शुद्ध मुनाफा बढ़ जाता है।
मूंग की खेती की बात करें तो इसमें लागत काफी कम आती है। इसमें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, केवल 2 से 3 हल्की सिंचाई में ही फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है। बीज की मात्रा भी कम लगती है, करीब 12 से 15 किलो प्रति एकड़ बीज पर्याप्त होता है। इसकी बुवाई कतारों में की जाती है, जिसमें कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर और पौधों के बीच की दूरी 8 से 10 सेंटीमीटर रखी जाती है।
कटाई के बाद किसान मूंग और मक्का जैसी फसलों की खेती कर सकते हैं। मूंग की फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है, आमतौर पर 60 से 70 दिनों में यह पककर तैयार हो जाती है। वहीं मक्क ा भी 70 से 80 दिनों में तैयार हो जाता है और इसे चारे या भुट्टे दोनों रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसानों को एक अतिरिक्त फसल मिलती है, जो उनकी आय बढ़ाने में मदद करती है।
दलहन फसलों की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती हैं। खासकर मूंग जैसी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे अगली फसल के लिए जमीन और भी उपजाऊ हो जाती है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ भी फसल चक्र अपनाने की सलाह देते हैं।इससे किसान की आय भी बढ़ती है और जमीन की गुणवत्ता भी बनी रहती है।












