ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। एनसीईआरटी ने पहली बार 1975-77 की इमरजेंसी को 9वीं क्लास की बुक में शामिल किया है। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 9वीं की सोशल साइंस की नई बुक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में पहली बार सेकेंडरी स्कूल के सिलेबस में इमरजेंसी का जिक्र किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि क्लास 9 की पिछली किताब में इमरजेंसी को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन बदले हुए सिलेबस में इसके लिए एक अलग सेक्शन जोड़ा गया है। आपातकाल पर चैप्टर शामिल किए जाने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘यह सही है। एनसीईआरटी ने बिल्कुल सही किया है। आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल के काले कारनामों के बारे में पता होना चाहिए और उन्हें समझना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने। इसीलिए ऐसा किया जा रहा है।
9वीं की सोशल साइंस बुक में क्या-क्या
बताया गया है कि ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ के चैप्टर में इमरजेंसी को लोकतांत्रिक ताकतों और कमजोरियों के बारे में पढ़ाया जाएगा। बुक में 1970 के दशक की शुरुआत के राजनीतिक असंतोष- जिसमें आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार से बढ़ती निराशा और उसके बाद हुई घटनाओं की की जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा इमरजेंसी के दौरान फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, गरीबी, क्षेत्रवाद, जातिगत भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों को जोड़ा गया है।
‘इंदिरा गांधी की इमरजेंसी’ पर क्या बताया गया है?
बुक में इमरजेंसी के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर बताया कि 1970 के दशक की शुरुआत में, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार से लोग खुश नहीं थे। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कई खराब नीतियों के आरोपों की वजह से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। भारत में लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई।
इमरजेंसी काल में सरकार ने क्या किया?
9वीं की बुक में आगे कहा गया है, ‘जून 1975 में, सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर नेशनल इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकारों को सस्पेंड कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।’
जेपी नारायण को बताया लोक नायक
नई बुक में जयप्रकाश नारायण को लोक नायक बताया गया है। नए चैप्टर में उन्हें अहमियत देते हुए एक वरिष्ठ समाजवादी नेता और ‘लोक नायक’ के नाम से मशहूर बताया गया है।
किताब में कहा गया है, ‘लोक नायक के नाम से मशहूर राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में, लोगों को एकजुट किया।
1977 में इमरजेंसी हटाई गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी राय जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत दिखाई और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।’
नए सेक्शन भी जोड़े गए
नई बुक, इमरजेंसी से आगे बढ़कर भारत में लोकतांत्रिक प्रथाओं की जड़ों को प्राचीन काल से जोड़कर देखती है और संवैधानिक संस्थाओं के विकास का खाका खींचती है। इसमें दो नए सेक्शन ‘लोकतंत्र और आप’ व ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ जोड़े गए हैं। ‘लोकतंत्र और आप’ से छात्र क्लास में सीखी गई बातों को अपने नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अपनी भूमिका से जोड़कर समझ सकें।
इसके अलावा ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’, सत्ता को जवाबदेह ठहराने और जनता की शिकायतों को लोकतांत्रिक चर्चा का हिस्सा बनाने में मीडिया की भूमिका को समझ सकें।













