ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर कामकाजी लोगों के बीच बहस जारी है। सभी इस बात की हिमायत करते हैं कि कामकाजी और निजी जीवन में संतुलन बहुत जरूरी है ताकि मेंटल बैलेंस बना रहे। इस बारे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि उनका जो काम है उसमें छुट्टी लेने की गुंजाइश नहीं है, और वह पारंपरिक तौर पर सोमवार से शुक्रवार तक काम करने के नियमों का पालन नहीं करते।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मद्रास में एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा, ‘मेरे जीवन में छुट्टी का दिन नहीं है। ऐसा नहीं है कि मैं सोमवार से शुक्रवार तक काम करता हूं और कहता हूं कि शनिवार-रविवार को मैं कुछ नहीं करूंगा क्योंकि दुनिया ऐसा नहीं करती।’
मीडिया से बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि उनकी जिंदगी एक टाइम जोन पर नहीं चलती। उन्होंने कहा, ‘मेरी जिंदगी बहुत उलझी हुई है; यह एक टाइम जोन पर काम नहीं करती, और इसमें कोई ऑफ स्विच या ऑन स्विच नहीं है।’
जिंदगी में बैलेंस की कमी नहीं
हालांकि, विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि उनकी जिंदगी में बैलेंस की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह आदतें बनाते हैं और शौक डेवलप करते हैं, जो उन्हें बाकी दुनिया से निपटने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं जो करने की कोशिश करता हूं, वह यह है कि इसके अंदर ऐसी आदतें, प्रैक्टिस और शौक बनाऊं जो आपको एक स्थिर, समझदार और मिलनसार इंसान बनाएं जो बाकी दुनिया से निपट सके।’
जयशंकर का मानना है कि एक अच्छी तरह से बनाया गया रोजाना का रूटीन जिसमें पढ़ना, लिखना, सोचना और बात करना शामिल हो, तो डिजिटल डिटॉक्स या ब्रेक की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, ‘अगर आप अपने रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी शामिल करते हैं, खुद को पढ़ने, लिखने, सोचने, बात करने, देखने के लिए कुछ समय देते हैं, तो मैं आपको बता सकता हूं कि आपका रोजाना का रूटीन इतना संतुलित होगा कि आपको अनप्लग यानी छुट्टी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।’
हल्के-फुल्के अंदाज में, जयशंकर ने कहा कि जरूरी नहीं कि वर्क-लाइफ बैलेंस पर उनके विचारों से घर पर सभी सहमत हों। उन्होंने कहा, ‘लेकिन मेरी पत्नी यहां बैठी हैं, और वह मुझसे असहमत हो सकती हैं।’ विदेश मंत्री की इस बात पर कार्यक्रम मौजूद लोग हंस पड़े।































