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एआई वीडियो पोस्ट करना अब पड़ेगा महंगा

सरकार ने डीपफेक पर और सख्त किए नियम

by Blitz India Media
February 23, 2026
in Hindi Edition
0
केंद्र सरकार ने 20 फरवरी 2026 से एआई और डीपफेक सामग्री के लिए नए आईटी नियम लागू किए। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 3 घंटे में आपत्तिजनक एआई कंटेंट हटाना होगा
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने गत दिनों डीपफेक सहित एआई (कृत्रिम मेधा) से तैयार और बनावटी सामग्री के प्रबंधन को लेकर ऑनलाइन मंचों के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। इसके तहत अब एक्स और इंस्टाग्राम जैसे मंचों को किसी सक्षम अधिकारी या अदालतों द्वारा निर्देशित की गई ऐसी किसी भी सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा।

सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 202। में संशोधनों को अधिसूचित किया है। इसके जरिये औपचारिक रूप से एआई से तैयार और बनावटी कटेंट को परिभाषित किया गया है। ये नए नियम 20 फरवरी, 2026 से लागू हो गए हैं। संशोधनों में ‘ध्वनि, दृश्य या ध्वनि-दृश्य जानकारी’ और ‘बनावटी रूप से तैयार की गई जानकारी’ को परिभाषित किया गया है जिसमें एआई द्वारा निर्मित या परिवर्तित ऐसी सामग्री शामिल है जो वास्तविक या प्रामाणिक प्रतीत होती है।

सामान्य संपादन, किसी सामग्री को बेहतर बनाने और नेक नीयत से किए गए शैक्षिक या डिजाइन कार्यों को इस परिभाषा से बाहर रखा गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय अधिसूचना में कहा कि प्रमुख परिवर्तनों में बनावटी सामग्री को ‘सूचना’ के रूप में मानना शामिल है। आईटी नियमों के तहत गैरकानूनी कार्यों के निर्धारण के लिए एआई-जनित सामग्री को अन्य सूचनाओं के समान माना जाएगा।

3 घंटे में हटेगा आपत्तिजनक एआई कंटेंट (पहले 36 घंटे)
सोशल मीडिया मंच को सरकारी या अदालती आदेशों पर अब 36 घंटे के बजाय तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। इसके अलावा, उपयोगकर्ता की शिकायतों के निवारण की समयसीमा भी कम कर दी गई है। नियमों के तहत एआई सामग्री की अनिवार्य रूप से लेबलिंग जरूरी है। बनावटी सामग्री बनाने या साझा करने की सुविधा देने वाले मंच को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सामग्री पर स्पष्ट रूप से और प्रमुखता से लिखना होगा कि कि यह एआई से बना है। जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां इसे स्थायी मेटाडेटा या पहचानकर्ताओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मध्यवर्ती (इंटरमीडियरीज) एक बार एआई लेबल या मेटाडेटा लगाए जाने के बाद उन्हें हटाने या छिपाने की अनुमति नहीं दे सकते।

सरकार ने डीपफेक पर और सख्त किए नियम बिंदुवार समझें
1- 3 घंटे में हटेगा आपत्तिजनक एआई कंटेंट अगर किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को फर्जी, भ्रामक या आपत्तिजनक एआई -जनरेटेड कंटेंट (खासकर डीपफेक) के बारे में पता चलता है या इसकी शिकायत मिलती है, तो उसे अब केवल 3 घंटे के भीतर उस कंटेंट को हटाना होगा।

2- यह पहले के 36 घंटे की समय-सीमा से काफी कम है, जो दर्शाता है कि सरकार इस तरह के कंटेंट के तेजी से प्रसार को रोकने के लिए कितनी गंभीर है। देरी होने पर अब सीधी जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म की होगी।

3- एआई कंटेंट की जानकारी देना यूजर के लिए अनिवार्य

4- कंटेंट पोस्ट करते समय अब यूजर को स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि उसका डाला गया वीडियो, इमेज या टेक्स्ट एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा बनाया गया है या नहीं।

5- केवल यूजर की घोषणा पर भरोसा नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी टेक्नोलॉजी (जैसे एआई डिटेक्शन टूल्स) का उपयोग करके यह जांचना होगा कि यूजर द्वारा दी गई जानकारी सही है या नहीं। यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

6- बच्चों, निजी डेटा और हिंसा से जुड़े एआई कंटेंट पर ‘जीरो टॉलरेंस’ऐसे एआई-जनरेटेड कंटेंट पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री बिना सहमति के किसी व्यक्ति की निजी/एडिटेड तस्वीरें या वीडियो फर्जी सरकारी दस्तावेज़ या हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री दिखाते हैं।

7- ऐसे संवेदनशील मामलों में, प्लेटफॉर्म को किसी शिकायत या सरकारी आदेश का इंतजार नहीं करना होगा। उन्हें तुरंत ऐसे कंटेंट को हटाना होगा।

8- नियम तोड़ने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाई

9- अगर कोई सोशल मीडिया कंपनी इन नए और सख्त आईटी नियमों का पालन करने में विफल रहती है, तो उसकी कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है।

10- इसका मतलब है कि अब सिर्फ कंटेंट बनाने या पोस्ट करने वाला यूजर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी सीधे तौर पर कानूनी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होगा। यह कंपनियों पर नियमों का कड़ाई से पालन करने का दबाव बढ़ाएगा।

11- बढ़ा हुआ ‘डिलिजेंस’ और सक्रिय निगरानी

12- प्लेटफॉर्म्स को अब केवल शिकायत मिलने पर ही नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से ऐसे कंटेंट की पहचान और उसे हटाने के लिए मजबूत सिस्टम विकसित करने होंगे।

13- उन्हें अपने यूजर्स को इन नियमों और एआई कंटेंट से जुड़े खतरों के बारे में नियमित रूप से जागरूक करना होगा, जिससे एक सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण बन सके।

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