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डोनाल्ड बने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति ट्रंप 2.0 टूटे कई रिकॉर्ड

भारत-अमेरिका के बीच बढ़ेगा निवेश दोनों देशों में संबंध होंगे और प्रगाढ़

by Blitz India Media
January 24, 2025
in Hindi Edition
0
donald-trump
विनोद शील

नई दिल्ली। अमेरिका में एक बार फिर ट्रंप ‘राज’ शुरू होने के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों पर क्या असर होगा; इसे लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञ अनेक तरह की संभावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। फिर भी जानकारों की मानें तो ट्रंप के प्रेसिडेंट बनने के बाद इस बात की उम्मीद अधिक जताई जा ही है कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के संबंध और प्रगाढ़ होंगे। इस उम्मीद के पीछे चीन को लेकर दोनों देशों की चिंता मुख्य वजह मानी जा रही है और कहा जा रहा है कि ये चिंता ही भारत एवं अमेरिका को और अधिक करीब लाएगी। यह बात इससे भी साफ हो जाती है कि शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले ही भाषण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा नहर पर चीन के प्रभाव को कम करने का जिक्र गंभीरतापूर्वक किया।
यह भी कहा जा रहा है कि यह ट्रेंड पिछले पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल जैसा ही रहेगा। क्वाड और मजबूत होगा। प्रशासन के कई विभागों में भारत के अच्छे संबंध बनेंगे। राजनीतिक और वैचारिक तालमेल भी अच्छा रहने की उम्मीद की जा रही। इसके साथ ही रक्षा, खुफिया और सुरक्षा मामलों में दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ेगा। इसके अलावा टेक्नोलॉजी में सहयोग की संभावनाएं बढ़ने के आसार भी हैं।
वॉशिंगटन में शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर किए गए अपने पोस्ट में लिखा है कि वाशिंगटन डीसी में राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करना एक ‘बड़ा सम्मान’ है। राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही उनकी उपस्थिति भारत-अमेरिका संबंधों और दोनों देशों के बीच वैश्विक कूटनीतिक संबंधों के महत्व को दर्शाती है।
अन्य चीजें भी फायदेमंद
उपरोक्त बातों के अलावा अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप की वापसी से भारत के लिए कुछ अन्य चीजें भी फायदेमंद साबित हो सकती हैं। एक यह कि दोनों देशों के नेताओं के बीच संबंध अच्छे हैं। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच अच्छी बातचीत होती है। ट्रंप के पूर्व एनएसए रॉबर्ट ओ’ब्रायन के अनुसार, ट्रंप, मोदी में खुद को देखते हैं।

दूसरा कारण उनका राष्ट्रवाद और जनता में उनकी लोकप्रियता है। दोनों नेताओं को याद होगा कि डोकलाम, बालाकोट और गलवान में अमेरिका ने भारत का साथ दिया था। दोनों देशों की राष्ट्रवादी विचारधाराओं में समानता है। तीसरा यह कि भारत की सरकार को यह ज्ञात है कि ट्रंप को कैसे प्रभावित किया जा सकता है।
भारत के लिए क्यों लकी है ट्रंप ‘राज’
भारत के लिए एक और चीज अनुकूल है कि अब तक ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा कर्मियों का चयन जिस तरह कर रहा है, वह भारत के लिए काफी भाग्यशाली रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज, प्रमुख उप एनएसए एलेक्स वोंग समेत वरिष्ठ से लेकर मध्य स्तर तक के प्रमुख विभागों में भारत के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले अधिकारी मौजूद रहे हैं और इसका अत्यधिक प्रभाव संबंधों को बेहतर बनाने पर पड़ता है। अब बस यह करना है कि भारत को वाशिंगटन में एक बेहतर आर्थिक वातावरण बनाने की जरूरत है, एक ऐसा वातावरण जिसमें व्यापार, आउटबाउंड और इनबाउंड निवेश और प्रौद्योगिकी शामिल हो।
चीन के लिए बढ़ सकती है टेंशन
इन सबके अतिरिक्त चीन के बारे में चिंता दोनों देशों को जोड़ती है। रणनीतिक, रक्षा, सप्लाई चेन और आर्थिक सहयोग इसी चिंता का परिणाम है। ऐसे में क्वाड का रोल बेहद अहम रहेगा। ट्रंप इस ग्रुप को पुनर्जीवित करने में गर्व महसूस करते हैं। यही वजह है कि वाशिंगटन डीसी में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित करके चीन को एक मजबूत मैसेज देना चाहते हैं। वहीं एक संभावना यह भी है कि चीन पर ट्रंप एक मजबूत लेकिन सावधानी भरा रुख बनाए रख सकते हैं, वैसा जो बाइडेन ने किया था। यह दिल्ली के लिए अच्छी खबर है क्योंकि ऐसा होने पर भारत को फायदा हो सकता।
चीन से सौदे की ओर बढ़ा अमेरिका तो…
अगर अमेरिका, अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक समाज की पहल का समर्थन करना बंद करने का फैसला करता है तो यह केवल क्षेत्र की दूसरी बड़ी शक्ति; चीन की ही मदद करता है। अगर अमेरिका को चीन के साथ सौदा करते देखा जाता है, तो इंडो-पैसिफिक में उसके खुद के सहयोगी अपने हितों को सुरक्षित करने के लिए वॉशिंगटन के ऐसा करने से पहले इसी तरह का सौदा करने की कोशिश करेंगे।
यूक्रेन-रूस पर पड़ेगा असर
अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला और सैन्य रूप से सबसे ताकतवर देश है। साथ ही यह कई अंतरराष्ट्रीय सामरिक गठबंधनों, आर्थिक और वित्तीय प्रणालियों और दुनिया के कई महत्वपूर्ण संस्थानों का केंद्र है। ट्रंप के आने पर मध्य-पूर्व में जारी जंग और यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म होने के बाद की व्यवस्था पर भी बड़े पैमाने पर प्रभाव पड़ सकता है।
‘मि.अनप्रिडिक्टेबल’ भी माने जाते हैं ट्रंप
ट्रंप को ‘मि.अनप्रिडिक्टेबल’ भी माना जाता है। ऐसे में कुछ भी कहना जल्दबाजी हो सकती है। वैसे ट्रंप सरकार में भारत और अमेरिका के व्यापार संबंधों में एक नई दिशा देखने को मिल सकती है क्योंकि ट्रंप प्रशासन ‘अमेरिका फर्स्ट ‘ की नीति पर जोर देता है जिसका भारत को सामना करना पड़ सकता है। सवाल ये है कि भारत इसे डिप्लोमैटिक तरीके से कैसे संभालेगा जिसमें एच 1 बी वीजा का मुद्दा भी शामिल है।
दक्षिण एशिया में कितना असर
दक्षिण एशिया में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव आते हैं। दक्षिण एशिया में भारत एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। इन देशों में भारत ने कुछ सालों में अपनी स्थिति मजबूत बनाई है। ट्रंप के जिस तरह से पीएम मोदी के साथ अच्छे संबंध हैं, ऐसे में उनके दूसरे कार्यकाल में भारत की स्थिति और मजबूत होने के आसार ही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका के साथ पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रिश्ते काफी बदल चुके हैं।
160 भारतीय कंपनियों का बम्पर निवेश
पिछले कुछ सालों में भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में अरबों का निवेश किया है। वॉशिंगटन में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों में से एक मुकेश अंबानी भी अपनी पत्नी के साथ शामिल हुए। उनकी वहां मौजूदगी भी आर्थिक सहयोग की नई संभावनाओं की स्थितियों को दर्शाती है। 2023 की पिछली सीआईआई रिपोर्ट यह बताती है कि 160 भारतीय कंपनियों ने 40 बिलियन डॉलर का निवेश किया है और 425,000 नौकरियां पैदा की हैं जो भारत में अमेरिकी निवेश का दो-तिहाई है।
‘मेक इन इंडिया’ पर क्या होगा प्रभाव
वैसे ट्रंप की विदेश नीति के अप्रत्याशित तौर- तरीकों से रणनीतिक अनिश्चितता भी बढ़ सकती है। रक्षा और तकनीकी संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि अमेरिका के लिए भारत क्या कर सकता है। व्यापार और निवेश दोनों क्षेत्रों में आर्थिक संबंधों को लेकर तनाव आ सकता है। ऐसी आशंका इसलिए व्यक्त की जा सकती है क्योंकि ट्रंप ने अपने पहले भाषण में अमेरिका को पुन: मैन्यूफैक्चरिंग का हब बनाने का एलान किया है। दरअसल भारत और अमेरिका, दोनों को यह समझना होगा कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेड इन अमेरिका’ एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं। ऊर्जा, जलवायु, क्रिप्टो, वीजा और यूरोप के साथ संबंधों पर ट्रंप के फैसलों का अप्रत्यक्ष प्रभाव भी भारत पर पड़ सकता है। ये अच्छे और बुरे दोनों तरह के हो सकते हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को दी बधाई
पीएम मोदी ने दोबारा अमेरिका का राष्ट्रपति बनने पर डोनाल्ड ट्रंप को बधाई दी है। उन्होंने अपने बधाई संदेश में कहा कि दोनों देश तरक्की के लिए मिलकर काम करेंगे।

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