ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाना आसान काम नहीं। जो सफल हो जाते हैं, उन्हें परवाज के लिए नया आसमान मिलता है। जो सफल नहीं हो पाते, उन अभ्यर्थियों के पास ज्ञान का भंडार तो होता है, लेकिन दिशा की कमी होती है। हालांकि, अगर इस ज्ञान को सही दिशा में लगाया जाए, तो अवसर खुद बनते चले जाते हैं। देहरादून में सिविल सेवा परीक्षाओं की प्रतिष्ठित ‘प्रयास’ कोचिंग सेंटर के संस्थापक सुशील सिंह की यात्रा भी इसी की बानगी है। वह बताते हैं, ‘2002 में जब मेरी प्रयास सीमा खत्म हो गई, तो मैंने एलएलबी, एलएलएम किए। फिर पीएचडी, किताबें लिखीं और फिर कोचिंग शुरू कर दी। मेरा मानना है कि इस तैयारी से मिला ज्ञान सही दिशा में लगाया जाए तो यह दूसरों के लिए भी मार्गदर्शन का जरिया बनता है। आज के दौर में आप देखेंगे जितनी भी प्रतियोगी पत्रिकाएं निकलती हैं, उनको कारगर बनाने में अधिकतर वे अभ्यर्थी होते हैं, जो कभी खुद यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। ’
एक स्किल स्कूल है यूपीएससी
इस परीक्षा की तैयारी में विकसित स्किल जैसे गहराई से पढ़ने और समझने की आदत, जटिल मुद्दों को सरल भाषा में समझाने की क्षमता, नोट्स बनाना- ये कंटेंट राइटिंग, रिसर्च, टीचिंग और पॉलिसी सेक्टर में उपयोगी साबित होते हैं। कई सॉफ्ट स्किल भी विकसित हो जाते हैं, जैसे विश्लेषण, तर्कक्षमता, दबाव सहने की क्षमता, समय प्रबंधन आदि। आज ये खूबियां हर नियोक्ता को चाहिए। असफलता से घबराने के बजाय अपनी विशेषताओं को पहचानकर स्किल्स निखारें और नए विकल्प तलाशें।
अच्छे वेतन के सेक्टर
भारत के कई संस्थान, जैसे टिस या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज पब्लिक पॉलिसी में एम.ए. या पीजी डिप्लोमा कराते हैं। यूपीएससी के सीसैट (सीसैट) की तैयारी आपको मैनेजमेंट की कैट परीक्षा के लॉजिकल रीजनिंग और रीडिंग कॉम्पि्रहेंशन की तैयारी का आधार देती है। इस तरह पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन या मैनेजमेंट में करियर के लिए भी यह पढ़ाई काम आती है।
सरकारी रिसर्च संस्थान डीआरडीओ, सीएसआईआर, आईसीएमआर जैसे सरकारी रिसर्च संस्थानों और डेवलपमेंट के क्षेत्र से जुड़े शोध संस्थानों में विकल्प खुलते हैं। यहां पॉलिसी रिसर्चर, प्रोजेक्ट मैनेजर के पदों के लिए यूपीएससी की तैयारी काम आती है।
दूसरे विकल्प पर विचार करें
वैसे तो इसका कोई एक फॉर्मूला नहीं कहा जा सकता। यह आपकी उम्र, जरूरत और उत्साह आदि पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ चीजों को ध्यान में रखें।
आपके पास कोई बैकअप स्किल या करिअर विकल्प नहीं है, तो हर अतिरिक्त साल की अहमियत आपके भविष्य के लिए बढ़ती जाती है।
वैकल्पिक विषय, अध्ययन सामग्री या रणनीति में बदलाव करने पर भी असफल रहे हैं, तो तैयारी व तरीकों का पुनर्मूल्यांकन करें।
तैयारी पूरी तरह छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे दूसरी तैयारी की ओर बढ़ें। 3 से 6 महीनों में कोई व्यावहारिक कौशल जरूर अर्जित करें।
हर साल करीब 15 हजार अभ्यर्थी मेन्स परीक्षा देते हैं। इंटरव्यू के लिए लगभग 2700–2800 उम्मीदवार पहुंचते हैं, जबकि वैकेंसी करीब 1000 होती हैं।
इस बार 2736 ने इंटरव्यू दिया और 956 का चयन हुआ। ऐसे में सवाल है कि बाकी डेढ़ हजार से ज्यादा उम्मीदवार आगे क्या करेंगे?
हर साल करीब 12 लाख अभ्यर्थियों में से 150-180 ही आईएएस बनते हैं, लेकिन बाकी भी अपने कौशल के दम पर आगे बढ़ते हैं।
इस तैयारी में विकसित क्षमताएं जर्नलिज्म से लेकर जैविक खेती तक कई क्षेत्रों में काम आती हैं। जान लें, यूपीएसएसी में मिली असफलता भी व्यर्थ नहीं जाती, रास्ते बन ही जाते हैं।













