ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद भी सरकार सतर्क है। सरकार ने प्राइवेट डिफेंस कंपनियों को अब एंटी-ड्रोन गोला-बारूद और आर्मर्ड कैरियर्स का प्रोडक्शन बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत प्राइवेट सेक्टर अब डिफेंस सप्लाई में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
भारत-पाक तनाव के वक्त भारत ने जैसी दमदार जवाबी कार्रवाई की, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। फिर चाहे वो हमारे मिसाइल सिस्टम हों, ड्रोन, टैंक्स या वॉर व्हीकल्स, डिफेन्स सेक्टर का हर पुर्जा अपनी ताकत का खुलकर प्रदर्शन कर रहा था। अब भले ही 10 मई से सीजफायर लागू हो गया हो, लेकिन सरकार किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मोदी सरकार ने भारत फोर्ज और महिंद्रा जैसी प्राइवेट डिफेन्स कंपनियों को खास निर्देश दिए हैं। सरकार चाहती है कि ये कंपनियां एंटी-ड्रोन गोला-बारूद, स्मार्ट एम्युनिशन और आर्मर्ड कैरियर्स का प्रोडक्शन तुरंत बढ़ाएं। ये ऑर्डर ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज की मौजूदा सप्लाई से एक्स्ट्रा दिए गए हैं।
भारत फोर्ज की ऊंची उड़ान
भारत फोर्ज की जेऊरी (पुणे के पास) में बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, जहां गन, आर्म्ड व्हीकल और दूसरे डिफेंस सिस्टम बनते हैं। हाल ही में कंपनी ने डिफेन्स मिनिस्ट्री के साथ बड़ा सौदा किया है, उसे 184 अटैग्स (एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम) सप्लाई करने का ऑर्डर मिला है। ये पूरी तरह देसी तोप है, जो 48 किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है। इसकी खास बात ये है कि इसमें हाइड्रॉलिक सिस्टम की जगह ऑल-इलेक्टि्रक ड्राइव है, जिससे इसका मेंटेनेंस काफी आसान हो जाता है। और तो और, ये बाकी तोपों के मुकाबले दोगुनी स्पीड से गोले दाग सकती है।
महिंद्रा डिफेन्स: अब सिर्फ एसयूवी नहीं, सेना की गाड़ियां भी बना रही है कंपनी
महिंद्रा ने कुछ साल पहले ही स्मॉल आर्म्स और उनके एम्युनिशन बनाने का लाइसेंस हासिल किया था। अब कंपनी का फोकस सिर्फ रक्षक और मार्क्समैन जैसे आर्मर्ड व्हीकल्स पर नहीं, बल्कि सीमाई इलाकों और शहरी युद्ध के लिए टैक्टिकल गाड़ियों पर भी है। महिंद्रा डिफेन्स पहले से ही इंडियन आर्मी के लिए आर्मर्ड और नॉन-आर्मर्ड कैरियर्स बना रही है। अब उसे इनकी सप्लाई और तेज करने को कहा गया है। ड्रोन की बढ़ती घुसपैठ को देखते हुए इंडियन आर्मी ने हाल ही में 23एमएम एंटी-ड्रोन एम्युनिशन के लिए इनपुट मांगे थे।
बढ़ रहा ‘मेक इन इंडिया’ डिफेंस प्रोडक्शन
देश का डिफेंस प्रोडक्शन वित्त वर्ष 24 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है। 10 साल पहले तक जहां 65-70% डिफेंस इक्विपमेंट बाहर से मंगवाए जाते थे, वहीं अब 65% से ज्यादा घरेलू स्तर पर बन रहे हैं। भारत फोर्ज, महिंद्रा, टाटा जैसी निजी कंपनियां अब कुल प्रोडक्शन में 21% का योगदान दे रही हैं। आज देश में 430 से ज्यादा लाइसेंस प्राप्त प्राइवेट कंपनियां और 16,000 से ज्यादा एमएसएमई इस सेक्टर में एक्टिव हैं।

























