ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारतीय बच्चों में कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। 15 साल से कम उम्र के बच्चों में हर साल लगभग 50,000 के करीब मामले रिपोर्ट किए जाते हैं, जो देश में सभी कैंसर के मामलों का 3-5% है।
कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारी है। आमतौर पर माना जाता है कि ये बीमारी सिर्फ युवाओं और वयस्कों को होती है, हालांकि बच्चों में बढ़ता कैंसर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की लिए लगातार मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है। खराब जीवनशैली, पर्यावरणीय प्रदूषण, खान-पान की गड़बड़ आदतें और जेनेटिक कारणों को बच्चों में बढ़ते कैंसर के लिए मुख्यरूप से जिम्मेदार माना जाता है। बच्चों में कैंसर इसलिए और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि कम उम्र में होने वाला कैंसर न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक विकास को भी प्रभावित करता है।
वैश्विक स्तर पर बच्चों में बढ़ते कैंसर की रोकथाम, कैंसर के शिकार बच्चों और उनके परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को लोगों को जागरूक करने और इन्हें समर्थन देने के उद्देश्य से हर साल 15 फरवरी को इंटरनेशनल चाइल्डहुड कैंसर डे मनाया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में कैंसर वयस्कों के कैंसर से अलग होता है, इसका अक्सर अचानक पता चलता है। ल्यूकेमिया (40%), लिम्फोमा और ब्रेन ट्यूमर बच्चों में सबसे आम प्रकार का कैंसर है।
























