ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। बिहार की राजधानी पटना में स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमसीएच) प्रशासन ने राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को स्नातक (एमबीबीएस) में 150 और स्नातकोत्तर (पीजी) की 20 सीटों में बढ़ोतरी के लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी की है।
अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो बिहार के सैकड़ों मेधावी छात्रों को अपने ही राज्य में चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर प्राप्त हो सकेंगे। हालांकि इस पहल से इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) और सुविधाओं की कमी एक बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो रही है।
क्या है सीटों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव ?
एनएमसीएच मैनेजमेंट का लक्ष्य है कि मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध संसाधनों का विस्तार किया जाए ताकि अधिक से अधिक छात्रों को प्रवेश दिया जा सके। वर्तमान में कॉलेज में एमबीबीएस की सीटों की संख्या सीमित है, जिसे बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके अलावा, विभिन्न विशिष्ट विषयों में पीजी की सीटों को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों में बढ़ोतरी से न केवल छात्रों को फायदा होगा, बल्कि अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार होगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चरः सफलता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा
सीटें बढ़ाना जितना आसान कागजों पर दिखता है, जमीन पर उसे लागू करना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। एनएमसी के नियमों के अनुसार, सीटों में बढ़ोतरी के लिए कॉलेज को कड़े मानकों को पूरा करना होता है। एनएमसीएच वर्तमान में कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। यदि छात्रों की संख्या बढ़ती है, तो उनके रहने के लिए पर्याप्त हॉस्टल और कमरों की आवश्यकता होगी। कॉलेज में वर्तमान हॉस्टल पहले से ही खचाखच भरे हुए हैं।
आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्याधुनिक लैब और बड़े लेक्चर हॉल की जरूरत होती है। वर्तमान बिल्डिंग में नई सीटों के हिसाब से जगह का अभाव है। छात्रों की संख्या के अनुपात में प्रोफेसरों और नर्सिंग स्टाफ की संख्या बढ़ाना भी एक अनिवार्य शर्त होती है। कॉलेज प्रशासन को रिक्त पदों को भरने के लिए भी सरकार की ओर ताकना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
एनएमसीएच के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे इन कमियों को दूर करने के लिए लगातार स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में हैं। बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए नए भवनों के निर्माण और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर के रिनोवेशन की योजना बनाई गई है। उनका मानना है कि यदि सरकार से समय पर बजट और संसाधन मिल जाते हैं, तो एनएमसी के निरीक्षण के दौरान कॉलेज अपनी योग्यता साबित कर सकेगा।
बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र पर प्रभाव
बिहार में जनसंख्या के अनुपात में डॉक्टरों की भारी कमी है। एनएमसीएच जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में सीटों का बढ़ना राज्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के उन छात्रों को राहत मिलेगी जो निजी मेडिकल कॉलेजों की भारी-भरकम फीस नहीं भर सकते।













