ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच वॉशिंगटन में शेड्यूल्ड मीटिंग टल गई है। दोनों देशों ने व्यापार वार्ता के एक महत्वपूर्ण दौर को वॉशिंगटन में दोबारा तय करने का फैसला किया है। इससे एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के मसौदे को अंतिम रूप देने के प्रयासों में देरी होने की आशंका है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आयात पर 10 फीसदी की आधार दर को तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के बाद आया है।
भारतीय वार्ता दल 23 फरवरी से तीन दिवसीय बैठक शुरू करने वाला था। हालांकि, अब दोनों पक्ष मानते हैं कि हाल के घटनाक्रमों और प्रस्तावित समझौते पर उनके निहितार्थों का मूल्यांकन करने के बाद ही चर्चा होनी चाहिए।
सख्त हुआ अमेरिका का रुख
सूत्रों के अनुसार, भारतीय मुख्य वार्ताकार और प्रतिनिधिमंडल की यात्रा दोनों सरकारों की ओर से आंतरिक आकलन पूरा करने के बाद पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तारीख पर तय की जाएगी। मीटिंग पोस्टपोन होने की खबर ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर अपना रुख कड़ा किया है। उन्होंने पहले घोषित 10 फीसदी की आधार दर को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया। यह टैरिफ रेट तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
क्या है संकेत?
इस कदम से भारत पर कुल टैरिफ का बोझ लगभग 18.4 फीसदी हो गया है। इसमें मोस्ट फेवर्ड नेशन दर भी शामिल है। यह दोनों देशों की ओर से राहत पर बातचीत करने के प्रयासों के बीच वॉशिंगटन के व्यापार रुख में नए सिरे से सख्ती का संकेत देता है। प्रशासन ने यह यह नहीं किया है कि कौन से देश ऊंचे रेट से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। सटीक कानूनी तंत्र का ब्योरा नहीं दिया गया है लेकिन, ट्रंप प्रशासन ने ग्लोबल टैरिफ बढ़ोतरी को पूरी तरह से मंजूरी प्राप्त और कानूनी रूप से सही बताया है।
आगे बढ़ सकती है अनिश्चितता
ग्लोबल टैरिफ में बदलाव अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया है। इस फैसले में उसने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट 1977 के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को गैर-कानूनी बताया था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना गया। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार का उल्लंघन किया। इस फैसले ने ट्रेड इकोसिस्टम में अतिरिक्त अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसने कई ट्रेड पार्टनर्स के साथ अमेरिका की चल रही बातचीत को जटिल कर दिया है। दोनों देशों के बीच ट्रेड टेंशन पिछले एक साल में उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अगस्त 2025 में वॉशिंगटन ने नई दिल्ली पर 25 फीसदी का जवाबी टैरिफ लगाया था। रूसी कच्चे तेल की भारत की खरीद से जुड़ा 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ इसे 50 फीसदी तक ले गया था।

























