ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। पश्चिम रेलवे के मुंबई मंडल ने अपने कम्युनिकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। अब पुराने सिस्टम की जगह नया और आधुनिक आईपी-एमपीएलएस नेटवर्क शुरू कर दिया गया है। इससे रेलवे का काम पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और आसान हो गया है। इस बदलाव से ट्रेन संचालन, टिकटिंग और सुरक्षा व्यवस्था को सीधा फायदा मिलना शुरू हुआ है।
क्यों पड़ी जरूरत?
मिली जानकारी के अनुसार, पहले रेलवे में एसडीएच नाम का पुराना सिस्टम चलता था। यह ऐसा था जैसे एक पतली सड़क, जिस पर सबको एक लाइन में चलना पड़ता था। अगर कहीं खराबी आ जाती थी तो काम धीमा हो जाता था लेकिन अब आईपी-एमपीएलएस ऐसा है जैसे चौड़ी और तेज सड़क, जिस पर कई गाड़ियां एक साथ चल सकती हैं। अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा रास्ता तुरंत काम करने लगता है। खास बात यह है कि यह सिस्टम ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनों चलता है, पहले वाला सिस्टम का इस्तेमाल भी ऑफलाइन किया जाता था, लेकिन वो इतना सटीक नहीं हुआ करता था। यह एक बैक बोन सिस्टम है, जिसके अधीन अन्य सिस्टम हैं।
इसी सिस्टम पर काम कर रहे हैं पीआरएस /यूटीएस
इस परियोजना के तहत पूरे मुंबई मंडल में 96 बड़े राउटर और 12 मुख्य राउटर लगाए गए हैं। 31 किलोमीटर से ज्यादा ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है। मुंबई सेंट्रल में एक केंद्रीय मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है, जहां से पूरे नेटवर्क पर नजर रखी जा रही है। कई स्टेशनों पर नए आईपी फोन लगाए गए हैं और वीओआईपी सिस्टम शुरू किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि ट्रेन कंट्रोल, ट्रैक्शन पावर कंट्रोल, टिकटिंग सिस्टम (पीआरएस/यूटीएस), माल गाड़ियों की जानकारी देने वाला सिस्टम , सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ अब इसी नए नेटवर्क पर काम कर रहे हैं।

























