ब्लिट्ज ब्यूरो
अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम नवमी के अवसर पर प्रभु रामलला के मस्तक पर होने वाले भव्य ‘सूर्य तिलक’ कार्यक्रम का संचालन अब हर वर्ष केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की द्वारा किया जाएगा। इसके लिए मंदिर ट्रस्ट सीबीआरआई के साथ 10 वर्षों का अनुबंध करने जा रहा है।
यह जानकारी राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने दो दिवसीय बैठक के बाद दी। उन्होंने बताया कि सूर्य तिलक की परंपरा को तकनीकी रूप से त्रुटिहीन बनाए रखने के लिए वही संस्था इसका संचालन करेगी, जिसने इसे विकसित किया है।
19 मार्च के बाद 15 मंदिरों में दर्शन
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर परिसर में स्थित अन्य 15 मंदिरों में आम श्रद्धालुओं के दर्शन 19 मार्च को आयोजित राष्ट्रपति कार्यक्रम के बाद शुरू कर दिए जाएंगे। एक समय में अधिकतम 1000 श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति होगी। सुरक्षा कारणों से पास प्रणाली लागू की जाएगी और केवल पासधारकों को ही प्रवेश मिलेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 4 घंटे का कार्यक्रम
नव संवत्सर को आयोजित विशेष उत्सव में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लगभग चार घंटे तक मंदिर परिसर में रहेंगी। कार्यक्रम के दौरान वे मंदिर के दूसरे तल के गर्भगृह में राम रक्षा यंत्र की स्थापना करेंगी। साथ ही मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लगभग 400 श्रमिकों और तकनीकी कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जा सकता है।
सितंबर में खुलेगा अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय
राम मंदिर परिसर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय का निर्माण कार्य सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। संग्रहालय में 20 गैलरियां बनाई जा रही हैं, जिनमें से एक विशेष गैलरी हनुमान जी को समर्पित होगी। इस गैलरी का निर्माण आईआईटी मद्रास की टीम द्वारा किया जा रहा है, जिसमें 3डी तकनीक के माध्यम से 12 मिनट की प्रस्तुति दिखाई जाएगी। हनुमान गैलरी में सीमित संख्या में टिकट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अन्य गैलरियों में प्रवेश निशुल्क रहेगा।
नृपेंद्र मिश्र के अनुसार मुख्य मंदिरों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। अब अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय, अस्थायी मंदिर और हुतात्मा स्मारक स्तंभ के निर्माण पर फोकस है। इन सभी कार्यों को 30 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, बाउंड्री वॉल निर्माण के दौरान सीवर लाइन आदि संरचनाओं की स्थिति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त भूमि को लेकर अरविंदो आश्रम से बातचीत जारी है।
‘सूर्य तिलक’ परंपरा रहेगी जारी
राम नवमी पर सूर्य की किरणों से प्रभु रामलला के मस्तक पर तिलक की वैज्ञानिक व्यवस्था को अब स्थायी स्वरूप दिया जा रहा है। सीबीआरआई द्वारा विकसित इस तकनीक के संचालन की जिम्मेदारी अगले 10 वर्षों तक उसी संस्था के पास रहेगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए।

























