ब्लिट्ज ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जन्म प्रमाण पत्र की गड़बड़ियों को दूर करने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा रोकने की दिशा में सरकार की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं और इसे आधार कार्ड से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन के समय माता-पिता के आधार नंबर को लिया जाएगा। इससे प्रमाण पत्र को लिंक किया जाएगा। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए मृतक का आधार नंबर लिंक किया जाएगा। इस संबंध में संबंधित विभागों को जल्द ही निर्देश जारी किए जाने की तैयारी है। यूपी के मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया है कि योजनाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए जन्म-मृत्यु की घटनाओं का रैपिड वेरिफिकेशन जरूरी है। इसीलिए इन दोनों प्रमाण पत्रों को सीआरएस पोर्टल से लिंक किया जाएगा। जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम 2023 की धारा-4 के आधार पर इसका डेटा राज्य स्तर पर तैयार किया जाना है।
सामने आए फर्जी मामले
उप्र में फर्जी जन्म प्रमाण से जुड़े मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं। रजिस्ट्रेशन प्रणाली सुधारने की जरूरत बताई गई है। सरकारी अस्पतालों से मां के डिस्चार्ज होने से पहले नवजात का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। निजी अस्पताल बच्चे के जन्म की सूचना आईडी से ऑनलाइन देंगे। प्रमाण पत्रों में अभिभावक, आवेदक या मृतक का आधार जरूर लगेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक साल से लटके मामलों में सीआरएस, वाद पोर्टल को लिंक किए जाने का निर्णय लिया गया है। इससे प्रमाण पत्र बनवाने में बाधा नहीं आएगी। आधार कार्ड से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के जुड़ने से इससे संबंधित गड़बड़ियों को दूर करने में कामयाबी मिलेगी।
जन्म-मृत्यु के बाद आएगी जानकारी
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्थाओं तक जानकारी तत्काल पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है। इसके लिए नियमों को मजबूत किया जाएगा। अस्पतालों और पंचायती राज संस्थाओं में इस संबंध में व्यवस्था होगी। सूचना को वेरिफाई किए जाने के बाद प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। जन्म प्रमाण पत्र के लिए माता-पिता का आधार नंबर लिया जाएगा। वहीं, मृत्यु के बाद संबंधित व्यक्ति का आधार कार्ड नंबर इसमें दर्ज किया जाएगा। सरकारी योजनाओं का लाभ इससे संबंधित सही पक्षों को मिल सकेगा।

























