ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। पूरा पश्चिम एशिया युद्ध की आग में धधक रहा है। अमेरिका -इजरायल के ईरान पर हमले जारी हैं। ईरान में अब तक 1000 से अधिक मौतें होने की सूचना है। ईरान ने भी कई देशों में अमेरिकी दूतावासों को निशान बनाकर ड्रोन व मिसाइल से हमले किए हैं। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के सात युद्धपोतों को नष्ट कर दिया है। ईरान के 24 शहरों पर यूएस-इजरायल ने हवाई हमले करके तबाही मचाई है। ईरान भी जवाबी कार्रवाई में पीछे नहीं रह रहा है। उसने इजरायल पर क्लस्टर म्यूनिशन से लैस बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। रिपोर्ट के अनुसार हालिया संघर्ष में यह पहली बार है जब इस तरह के हथियार इस्तेमाल किए गए हैं। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि इन मिसाइलों के वारहेड हवा में फटकर कई छोटे-छोटे बम गिराते हैं। कुछ मिसाइलों में करीब 80 तक छोटे विस्फोटक हो सकते हैं जो कई किलोमीटर के इलाके में फैल जाते हैं। इससे एक बड़े इलाके में नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।
– ईरान ने कई अमेरिकी दूतावासों को बनाया निशाना
ईरान के हमले में एक मिसाइल तेल अवीव के पास केंद्रीय इजरायल में गिरी। इस मिसाइल का वारहेड जमीन से करीब सात किमी की ऊंचाई पर खुल गया। इसके बाद लगभग 20 छोटे बम अलग-अलग दिशाओं में फैल गए। इनमें से एक बम तेल अवीव के दक्षिण में स्थित अजोर शहर के एक घर पर गिरा। इससे एक घर को नुकसान हुआ लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं पूरे हमले में अलग-अलग जगहों पर कम से कम 12 लोग घायल हुए बताए जा रहे हैं।
ईरानी हमले में कितने इजरायलियों की मौत?
इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी से अब तक ईरानी मिसाइल हमलों में इजरायल में कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है। और 1000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इजरायली सेना ने लोगों को चेतावनी दी है कि जमीन पर गिरे बिना फटे छोटे बम बेहद खतरनाक हो सकते हैं। ये बम लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं। और छूने या हिलाने पर फट सकते हैं।
ईरान ने कितनी क्लस्टर बम मिसाइलें दागी?
इजरायली अधिकारियों का यह भी दावा है कि ईरान ने पिछले कुछ दिनों में कम से कम पांच क्लस्टर मिसाइलें दागी हैं। इनमें से कई हमले घनी आबादी वाले इलाकों की ओर किए गए। क्लस्टर हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से विवाद रहा है। 2008 में 100 से ज्यादा देशों ने ‘कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन’ नाम की संधि पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें इन हथियारों के इस्तेमाल, उत्पादन और भंडारण पर प्रतिबंध लगाया गया है। इजरायल और ईरान दोनों ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। अमेरिका भी इस समझौते का हिस्सा नहीं है। इसलिए इन हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस लगातार जारी है।













