ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। धर्मांतरण निषेध विधेयक के मसौदे को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। जो व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है, उसे पहले 60 दिन का नोटिस देना होगा। साथ ही सक्षम प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी। धर्मांतरण के 25 दिनों के भीतर प्राधिकारी के पास इसे पंजीकृत कराना होगा, अन्यथा इसे अमान्य माना जाएगा। यदि धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति का कोई रक्त संबंधी इस बारे में शिकायत दर्ज कराता है कि यह गैरकानूनी है, तो पुलिस प्राथमिकी दर्ज करेगी और जांच करेगी। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में बलपूर्वक, धोखाधड़ी या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण का अधिकार शामिल नहीं है, बल्कि इसमें ऐसे गैरकानूनी धर्मांतरणों से संरक्षण का अधिकार शामिल है।
महाराष्ट्र में जबरन धर्मांतरण और तथाकथित ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रस्तावित धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 का मसौदा तैयार किया है। इसे हिंदुत्ववादी संगठनों और हिंदू समाज द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे आंदोलन की बड़ी सफलता माना जा रहा है। गौरतलब है कि देश में ‘लव जिहाद’ के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए देश के 12 राज्यों ने धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया है और अब महाराष्ट्र भी लागू करने जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून का मकसद जबरन या प्रलोभन से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। जबरन, प्रलोभन, धोखे या शादी के जरिए धर्मांतरण करने पर सख्त सजा का प्रावधान है। इस कानून का मसौदा सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
सरकार ने वादा पूरा किया- राणे
विधानभवन में पत्रकारों को कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने बताया कि चुनाव के दौरान महायुति सरकार ने महाराष्ट्र में सशक्त धर्मांतरण विरोधी कानून लाने का वादा किया था जिसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरा किया है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून कड़ा होगा और हिंदू महिलाओं को वास्तविक न्याय दिलाने वाला साबित होगा। प्रस्तावित महाराष्ट्र का यह कानून गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कानूनों से भी अधिक प्रभावी और सख्त होगा।
बहला-फुसलाकर धर्मांतरण कराने वाले को जेल
कैबिनेट मंत्री राणे ने बताया कि अब किसी भी महिला को बहला-फुसलाकर या दबाव डालकर धर्मांतरण कराने वाले को जेल जाना ही पड़ेगा। प्रस्तावित कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का जबरन या धोखे से धर्मांतरण कराया जाता है, तो संबंधित आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती अपराध दर्ज किया जाएगा और उसे आसानी से जमानत नहीं मिल सकेगी। जो लोग दोबारा अपने मूल हिंदू धर्म में लौटना चाहते हैं, उन्हें इस कानून के तहत विशेष संरक्षण और सहायता देने का प्रावधान किया गया है। मिशनरियों के माध्यम से होने वाले सामूहिक धर्मांतरण को रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई की व्यवस्था भी इसमें शामिल की गई है।
दोनों सदन में चर्चा होगी
मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब यह विधेयक विधानसभा और विधान परिषद में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ‘धर्मस्वातंत्र्य अधिनियम 2026’ पूरे महाराष्ट्र में लागू हो जाएगा।












