ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। ‘आहार 2026’ के उद्घाटन के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ऐसी प्रदर्शनियां भारत को मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीएज) द्वारा निर्मित अवसरों का लाभ उठाने में मदद करती हैं। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के सातवें सबसे बड़े कृषि निर्यातक के रूप में उभरा है। कृषि और समुद्री क्षेत्रों में किसान और मछुआरे मिलकर सालाना लगभग ₹5 लाख करोड़ मूल्य के उत्पादों का निर्यात करते हैं। सरकार को उम्मीद है कि वैश्विक व्यापार साझेदारियों के विस्तार से भारत की निर्यात क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में नौ एफटीएज संपन्न किए हैं, जिससे 38 विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बाजारों तक पहुंच खुली है। ये समझौते भारतीय निर्यातकों को बाजारों तक तरजीही पहुंच प्रदान करते हैं और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण में सहायता करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि घरेलू हितों की रक्षा के लिए व्यापार वार्ताओं में चावल, गेहूं, मक्क ा, सोया मील और दालों की कई किस्मों जैसी प्रमुख कृषि वस्तुओं को सुरक्षित रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम का आयोजन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और भारत व्यापार संवर्धन संगठन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। ‘आहार-2026’ में पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया गया। वैश्विक नेतृत्व में भारत की अगली छलांग खाद्य, कृषि और आतिथ्य क्षेत्रों में सहयोग के माध्यम से निर्मित होगी, जो मजबूत मूल्यवर्धन और बाजार संबंधों द्वारा समर्थित होगी। उन्होंने आगे कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों (2014-2025) में भारत के कृषि और खाद्य निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का निर्यात चार गुना, फल और दालों का निर्यात तीन गुना, प्रसंस्कृत सब्जियों का निर्यात चार गुना, कोको का निर्यात तीन गुना और अनाज का निर्यात दोगुना हो गया है – इस अवधि के दौरान चावल के निर्यात में 62% की वृद्धि हुई है।
मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ये उपलब्धियां भारत को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात में वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेंगी, जो प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है कि भारत को ‘विश्व की खाद्य टोकरी’ बनाया जाए।
भारत को अब वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से में तरजीही बाजार पहुंच प्राप्त है जिससे निवेश गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई है और व्यवसायों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत होने में मदद मिली है।













